जन-जन में राष्ट्रीयता का भाव जगाना ही संघ का उद्देश्य : डॉ. कृष्ण गोपाल

 








सह सरकार्यवाह बोले- हिंदू जीवन दर्शन में ही वैश्विक समस्याओं के समाधान का मार्ग, समाज से जातिगत भेदभाव मिटाने का आह्वान

प्रयागराज, 29 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का उद्देश्य जन-जन में राष्ट्रीयता और देशभक्ति का भाव जागृत करना है। पिछले 100 वर्षों में संघ ने समाज के वंचित और अभावग्रस्त लोगों की सेवा के साथ राष्ट्रभाव को मजबूत करने का काम किया है। संघ के शताब्दी वर्ष के विभिन्न कार्यक्रमों में अब तक करीब पांच करोड़ लोग सहभागी बन चुके हैं। देशवासियों में संघ को जानने की बढ़ती उत्सुकता को देखते हुए प्रमुख जन संवाद संगोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने शनिवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन भवन में आयोजित प्रमुख जन संवाद संगोष्ठी में कही।

उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व पर्यावरण संकट और एक-दूसरे पर वर्चस्व स्थापित करने की होड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। भारत के हिंदू जीवन दर्शन में इन समस्याओं के समाधान का मार्ग है। यह दर्शन सभी के कल्याण की कामना करता है और सभी मत-पंथों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखता है। उन्होंने कहा कि हिंदू जीवन दर्शन प्रकृति के प्रत्येक कण में ईश्वर का दर्शन करता है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण की भावना भी इसमें निहित है।

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत ने हमेशा असहिष्णुता के बीच सहिष्णुता का संदेश दिया है। हिंदू दर्शन सभी मत-पंथों को साथ लेकर चलने और अपने-पराए में समानता का भाव रखने वाला उदार जीवन दर्शन है। विश्व आज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भारत की ओर देख रहा है।

जातिगत भेदभाव समाप्त करने की पहल हो

सह सरकार्यवाह ने समाज में बचे जातिगत भेदभाव को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह भाव पैदा करने की जरूरत है कि सभी अपने हैं और कोई पराया नहीं है। स्वयंसेवकों को समाज के बीच जाकर लोगों के मन बदलने और आपसी दूरियां कम करने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

संघ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जब देश गुलाम था, तब डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज की स्थिति को समझते हुए संघ की स्थापना की। उनका मानना था कि हजारों वर्षों से भारत को अपनी मातृभूमि मानने वाला हिंदू समाज जागरूक और संगठित नहीं होगा तो देश को मजबूत बनाना कठिन होगा।

उन्होंने कहा कि भारत में एक ऐसा समाज है जो अपनी मातृभूमि पर आने वाले संकट से दुखी होता है और देश की प्रगति से आनंदित होता है। उस समाज को हिंदू समाज कहा जाता है। शाखाओं के माध्यम से लोगों के मन में देशभक्ति और राष्ट्रभाव जगाने के उद्देश्य से संघ का विस्तार हुआ।

किसी के विरोध में नहीं है संघ

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ की स्पष्ट कल्पना है कि हिंदू समाज न किसी से भयभीत होगा और न किसी को भयभीत करेगा। उन्होंने कहा कि संघ आत्मनिर्भर संगठन है और किसी की कृपा या सहायता पर निर्भर होकर काम नहीं करता।

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता से पहले संघ का मुख्य कार्य कार्यकर्ताओं का निर्माण करना था। अब संघ सामाजिक परिवर्तन के कार्य में भी सक्रिय है। संघ की प्रेरणा से 40 अखिल भारतीय स्तर के संगठन विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

पांच करोड़ लोग शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से जुड़े

उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष की यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव आए। महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया और करीब 70 हजार स्वयंसेवकों को जेल भेजा गया, लेकिन संघ अपने ध्येय मार्ग पर आगे बढ़ता रहा। शताब्दी वर्ष में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में करीब पांच करोड़ लोगों की सहभागिता संघ के प्रति समाज की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।

कार्यक्रम में सह प्रांत संघचालक प्रो. राणा कृष्ण पाल और विभाग संघचालक प्रो. केपी सिंह मंच पर उपस्थित रहे। गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष, प्रांत प्रचारक रमेश, सह प्रांत प्रचारक सुनील, सह प्रांत कार्यवाह प्रो. राजबिहारी, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. मुरारजी त्रिपाठी, गोष्ठी संयोजक आलोक मालवीय, विभाग प्रचारक सुबन्धु, सह भाग संघचालक सरदार मिल्कियत सिंह, विभाग प्रचार प्रमुख वसु, कृष्ण मनोहर और गोविंद शरण समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

संगोष्ठी में पूर्व कुलपति, राजनीतिक कार्यकर्ता, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्राध्यापक, प्रधानाचार्य, व्यवसायी, मातृशक्ति और संगठन के विशिष्ट कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। संचालन विभाग कार्यवाह प्रो. संजय ने और धन्यवाद ज्ञापन सह विभाग कार्यवाह आशीष मोहन ने किया। एएमए अध्यक्ष डॉ. अशोक मिश्रा ने मंचस्थ अतिथियों को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, बटुकों के वैदिक मंगलाचरण और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् से हुआ। समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल