सत्ता में आने के लिए बहुजन समाज का एकजुट हाेना जरूरी: मायावती
लखनऊ, 22 मार्च (हि.स.)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि बहुजन समाज की सुरक्षा व अस्मिता के मिशनरी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुजनों को एकजुटता जरूरी है। एकजुट रहकर मुस्तैदी के साथ कार्य करते हुए चुनावी सफलता अर्जित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। वरना आरक्षण सहित बहुजनों के हित व कल्याण के अहम मामलों में विरोधी पार्टियों की सरकारों की कथनी व करनी में अंतर है। इनके वादे और दावों व जमीनी हकीकत में भारी अन्तर्विरोध एवं नीयत व नीति में खोट के कारण हालात बद से बदतर होते चले जायेंगे।
बसपा प्रमुख रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक की। इसमें प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बीते दिनाें दिए गए कार्याें की समीक्षा में बेहतर परिणाम मिलने पर बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं की कार्याें की सरहना की। बैठक को सम्बोधित करते हुए मायावती ने कहा कि मध्य प्रदेश, बिहार प्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य में बढ़ती हुई जातिवादी आपराधिक घटनाओं का संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि ठीक चुनाव से पहले सरकारों की ओर से दिये जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों से से खुद को बचाना होगा ताकि आने वाले पांच साल उनके लिए ’अच्छे दिन’ के बजाय और ज्यादा बुरे दिन न साबित हों, जैसा कि इन दोनों राज्यों का भी पिछला अनुभव रहा है।
मायावती ने कहा कि दलित व ओबीसी समाज को, जो जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े जा रहे हैं, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए आपसी सद्भावना व भाईचारा के आधार पर ’बहुजन समाज’ की एकता से पूरी तरह से जुड़ना होगा, तभी वोट हमारा राज तम्हारा, अब और नहीं चलेगा का नारा व संकल्प सामाजिक परिवर्तन की वास्तविकता के रूप में साकार हो पायेगा।
उन्होंने कहा कि बसपा ने यूपी जैसे विशाल, महत्वपूर्ण व संवेदनशील राज्य में एक बार नहीं बल्कि अब तक चार बार अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर सरकार चलाकर और सर्वसमाज के जान, माल व मज़हब के सुरक्षा की संवैधानिक गारण्टी को ’कानून द्वारा कानून का राज स्थापित करके भी दिखाया है, जो कि देश में किसी भी पार्टी की सरकार में सुनने व देखने को नहीं मिलती है। यही असली बात है बसपा की करनी में जबकि दूसरी पार्टी की सरकारों की कथनी और करनी में ईमानदारी नहीं है बल्कि उनमें भारी छलावा है। ऐसे समय में जब सत्ताधारी पार्टियां समाज व सत्ता में अपना वर्चस्व बरकरार रखने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के साथ-साथ साम, दाम, दण्ड, भेद हर प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाने पर तुली हुई हैं। खासकर दलित व ओबीसी आदि ’बहुजन समाज के हर अंग को चुनावी सफलता हासिल करने के लिये पूरे जी-जान से कमर कसना होगा, ताकि उन्हें पिछड़ने व पछाड़ने के जातिवादी व शोषणकारी व्यवस्था से ’शासक वर्ग’ बनकर मुक्ति मिल सके।
मायावती ने कहा कि देश के जो हालात हैं उसमें केन्द्र एवं राज्य सरकारों की गलत नीति, भ्रष्ट कार्यकलापों तथा गरीब व किसान विरोधी रवैयों का सबसे बुरा खामियाज़ा इन्हीं ’बहुजन समाज के बहुजन लोगों को उठाना पड़ रहा है। इससे उनका जीवन त्रस्त है, जबकि मुट्ठीभर बड़े-बड़े पूंजीपति व धन्नासेठों के साथ-साथ विशेषकर सत्ताधारी पार्टी और उनके लोगों का जो दिन दोगुनी व रात चौगुनी विकास कैसे हो रहा है ? वह किसी से भी छिपा हुआ नहीं बल्कि सबकी नज़रों के सामने है। अतः बहुजन समाज अर्थात् बहुजनों को भी अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए चुनावी सफलता हासिल करके केन्द्र व राज्य की सत्ता अपने हांथों में लेनी ही होगी, इसी संकल्प को जीवन में उतारना बहुत जरूरी है।
बसपा प्रमुख ने मध्य प्रदेश, बिहार प्रदेश व छत्तीसगढ़ स्टेट यूनिट के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती और बसपा की स्थापना दिवस भी पूरी मिशनरी उद्देश्यों के तहत मनाने की अपील भी की।
हिन्दुस्थान समाचार / दीपक