आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर देवभूमि, जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना बढ़े दर्शनार्थी

 


-धारी देवी में दोगुनी, पूर्णागिरि धाम में डेढ़ गुना बढ़ोतरी

देहरादून, 03 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा के साथ ही राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 की पहली छमाही में जागेश्वर धाम और त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ी है, जबकि धारी देवी में करीब दोगुनी और पूर्णागिरि धाम में लगभग डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए चारधाम के साथ अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने, मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन के तहत कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों के विकास, तीर्थस्थलों पर आधारभूत एवं आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और सड़क और परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव धार्मिक पर्यटन पर दिखाई दे रहा है। चारधाम यात्रा के साथ ही राज्य के अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। चारधाम यात्रा इस वर्ष नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। यात्रा के 105 दिनों में अब तक 45 लाख 84 हजार 375 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं।

पर्यटन विभाग की जनवरी से जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में इस वर्ष 1,74,119 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 67,875 थी। रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण मंदिर में 3,40,385 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि में यह संख्या 1,36,120 थी।

चम्पावत स्थित पूर्णागिरि धाम में इस वर्ष जून तक 20,91,788 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 14,35,290 थी। श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 5,42,626 पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 2,83,275 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।

ऋषिकेश से सटे मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र भी धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। इस वर्ष जनवरी से जून तक यहां 15,97,439 पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 13,62,600 था। इसके अलावा कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उत्तरकाशी स्थित यमुनोत्री धाम ने भी इस वर्ष नया इतिहास रचा है। दो अगस्त तक 6,54,958 श्रद्धालु यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले वर्ष 2025 में 6,44,637 श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी नए कीर्तिमान की ओर बढ़ रही है। यात्रा के पहले 100 दिनों में 15,52,021 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 12,40,408 थी। इस प्रकार इस वर्ष 3,11,613 अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंचे हैं।

पिथौरागढ़ जिले के आदि कैलाश धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के दो माह के भीतर 52,441 श्रद्धालु आदि कैलाश पहुंच चुके हैं। मानसून के कारण फिलहाल यात्रा एक जुलाई से स्थगित है। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश यात्रा में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

नैनीताल जिले के कैंची धाम में भी आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। इस वर्ष जनवरी से जून तक 24,34,507 श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें जून माह में सर्वाधिक 8.66 लाख श्रद्धालुओं ने धाम में दर्शन किए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय