टैरिफ का भय दिखाने से डरने की आवश्यकता नहीं, स्वदेशी से हो रहा सशक्त भारत का निर्माण: डॉ भागवत

 


देहरादून, 22 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि किसी टैरिफ का भय दिखाने से डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि स्वदेशी को जीवन में अपनाकर ही सशक्त भारत का निर्माण होगा।

डॉ भागवत रविवार को संघ शताब्दी वर्ष पर गढ़ी कैंट हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सरसंघचालक डॉ भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर अब तक की तमाम गतिविधियों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने संघ के उद्देश्य, कार्य और भविष्य की गतिविधियों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ क्या है और क्या करता है, इसकी सही जानकारी समाज के बड़े वर्ग को नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ के बारे में जो धारणा बनाई जाती हैं, वह संघ नहीं है। संघ के वास्तविक कार्य को जानने के लिए संघ को उसके नजदीक जाने पर ही जाना जा सकता है। डॉ भागवत ने कहा कि संघ कोई राजनीति दल भी नहीं है। इतना जरूर है कि संघ कार्यकर्ता राजनीतिक दलों में जाते हैं लेकिन जाने से पहले उन्हें संघ के सारे दायित्वों का त्याग करना पड़ता है।

डाॅ भागवत ने कहा कि संघ कोई अखाड़ा या संगीतशाला नहीं है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों में सेवा कार्य करने वाला संगठन है। संघ किसी विशेष परिस्थिति में बना संगठन नहीं, बल्कि सतत चलने वाला कार्य है। यह किसी प्रतिक्रिया या प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं बना है और न ही उसे लोकप्रियता या सत्ता की इच्छा है। भागवत ने कहा कि सुरक्षित और प्रतिष्ठित वही होते हैं, जिनका देश प्रतिष्ठित और बलवान हो। युगांडा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश को बड़ा बनाना ही लक्ष्य होना चाहिए। व्यवस्था परिवर्तन के लिए समाज को देशहित में उत्तम कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी जैसे महापुरुषों की आवश्यकता है, लेकिन केवल नाम लेने से नहीं, उनके आदर्शों को जीवन में उतारने से परिवर्तन होगा।

शाखा में बसती है संघ की मूल आत्मा

डॉ भागवत ने कहा कि संघ का मूल शाखा है। शाखा वह कार्यशाल है, जहां व्यक्ति का निर्माण किया जाता है। उसमें राष्ट्रीय भावना जागृत होती और वह फिर राष्ट्र की सेवा में जुट जाता है। उन्होंने कहा वर्ष 1928 में पहला पथ संचलन निकला था। उस समय संघ का कार्य लोगों को शब्दों का खेल लगता था, लेकिन आज व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। भाजपा को देखकर संघ की कल्पना करना उचित नहीं है। स्वयंसेवक संघ के हैं और रहेंगे, लेकिन संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है।

डॉ हेडगेवार का जीवन प्रेरणा और ऊर्जा

डॉ भावगत ने कहा कि संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. हेडगेवार 11 वर्ष की आयु में अनाथ हो गए थे, किंतु अध्ययन काल से ही वे देशहित में सक्रिय रहे। वे संगठन कुशल थे और राजस्थान से आंध्र प्रदेश तक क्रांतिकारी कार्यों से जुड़े रहे। स्वतंत्रता के बाद समाज में विकृतियां आईं और अंग्रेजों की फूट डालो नीति को अपनाया। ऐसे में समाज को जागृत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार समाज का गहन अध्ययन करते थे और महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय, विनायक दामोदर सावरकर सहित अन्य महापुरुषों से संवाद करते थे। डॉ हेडगेवार ने राष्ट्र के लिए वह कार्य किया है, जो आज भी सतत आगे बढ़ रहा है और समाज के पथ प्रदर्शक के रूप में कार्य कर रहा है।

हिंदू समाज का सबको साथ लेकर चलने का स्वभाव

भागवत ने कहा कि विविधता तात्कालिक है, सत्य एक है और सबमें एक ही तत्व है। सबका सम्मान करते हुए मिल-जुलकर चलने की भावना ही हिंदू है। हिंदू हमारे स्वभाव की पहचान है और समाज के स्वभाव को संस्कृति कहा जाता है। हिंदू को संगठित कर चरित्र और संस्कारों के माध्यम से धर्म-संस्कृति का आचरण करना होगा। विश्व कल्याण की भावना ही हमारा उद्देश्य है।

टैरिफ के भय से डरने की आवष्यकता नहीं

उन्होंने स्वदेशी पर बल देते हुए कहा कि किसी टैरिफ का भय दिखाने से डरने की आवश्यकता नहीं है। स्वदेशी को जीवन में अपनाना होगा। संघ को कोई श्रेय नहीं चाहिए, श्रेय लेना आंशिक पराजय है। सेवा कार्यों के लिए सेवा भारती सहित विभिन्न उपक्रम कार्य कर रहे हैं। पंच परिवर्तन के संकल्प के साथ समाज जागरण का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी के आधार पर ही सशक्त का भारत का निर्माण हो रहा है। प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 13,133 गांवों में प्रत्यक्ष संपर्क किया गया है।

कार्यक्रम में क्षेत्र संघ चालक सूर्य प्रकाश टौंक और बहादुर सिंह बिष्ट सरसंघचालक डाॅ भागवत के साथ मंच पर रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले, क्षेत्र कार्यवाह प्रमोद, क्षेत्र प्रचारक महेंद्र, क्षेत्र प्रचारक प्रमुख जगदीश, क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम, सेवा प्रमुख धनीराम, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र, प्रांत कार्यवाह चंद्रशेखर आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल