जापानी श्रद्धालुओं ने श्री दक्षिण काली मंदिर में की पूजा-अर्चना, छह जापानी संत बनेंगे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर
हरिद्वार, 03 जुलाई (हि.स.)। सनातन संस्कृति के प्रति जापान में बढ़ते आकर्षण का एक और उदाहरण शुक्रवार को धर्मनगरी हरिद्वार में देखने को मिला। जापान से आए श्रद्धालुओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री दक्षिण काली मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर भारतीय परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं का फूलमालाओं से स्वागत किया गया तथा उन्हें माता की चुनरी और नारियल भेंट कर सम्मानित किया गया।
जापान के महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी और महंत दर्शन भारती के नेतृत्व में हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है, जिसने सदैव मानवता को शांति, सद्भाव और कल्याण का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की सार्वभौमिक विचारधारा और मानवीय मूल्यों के कारण विश्वभर में इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में स्वामी बालाकुंभ पुरी के छह शिष्यों दाईसाकू नारीता, केन्ता इशियामा, हिरोकी ताकाहाशी, योशिमी मोरिया, मासाकी गोतो तथा ताकानोबू सोगा को तिलक और चादर प्रदान कर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर पद से विभूषित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सभी जापानी श्रद्धालुओं को अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।
महंत दर्शन भारती ने इस मौके पर कहा कि सनातन धर्म की अनूठी विशेषताएं, सहिष्णुता और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना से प्रभावित होकर विश्व के विभिन्न देशों के लोग भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत आज पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी ने कहा कि जापान में सनातन संस्कृति को अपनाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में जापानी नागरिक भारतीय दर्शन, योग, ध्यान और वैदिक जीवन शैली से जुड़ रहे हैं तथा सनातन धर्म के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात कर रहे हैं।
इस बीच निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने बताया कि जापान के संतों का 4 जुलाई को निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक प्रस्तावित था, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज के नासिक प्रवास पर होने के कारण कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पट्टाभिषेक समारोह की नई तिथि शीघ्र घोषित की जाएगी।
कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी सहित जापान से आए हिरोकी ताकाहाशी, रिइको ताकाहाशी, कीइसुके सुगा, ताकानोबू सोगा, नोरिको मात्सुओ, काया योशिया, सायाको किमुरा, योको इशिकावा, हितोमी चिकुगो, माना त्सुचिया, साओरी योशिओ, रिइका यानो, योको इगुची, योशिमी मोरिया, ची मासातोमी समेत करीब दो दर्जन जापानी श्रद्धालु उपस्थित रहे।----------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला