पूर्व राज्यपाल एवं ले. जनरल लखेड़ा का निधन, मंगलवार को हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार
देहरादून, 29 जून (हि.स.)। सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और मिजोरम और पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन (एम.एम.) लखेड़ा (सेवानिवृत्त) का सोमवार को देहरादून में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन से सैन्य, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार (30 जून) को हरिद्वार में किया जाएगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ले. जनरल लखेड़ा के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
दिवंगत की पुत्री अलका कुकरेती ने बताया कि उनके पिता पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थे। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह नौ बजे सहस्त्रधारा रोड स्थित उनके आवास '28ए, पनाश वैली' से हरिद्वार के लिए रवाना होगी।
टिहरी गढ़वाल जिले के जखण्ड गांव में जन्मे लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने पहाड़ की कठिन परिस्थितियों से निकलकर भारतीय सेना और सार्वजनिक जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 1958 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने लगभग चार दशक तक विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य दायित्वों का निर्वहन किया और सेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल व मिजोरम के राज्यपाल के रूप में भी राष्ट्र की सेवा की। उनका पैतृक गांव जखण्ड आज भी उत्तराखंड के लिए गौरव और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है।
ले. जनरल लखेड़ा का सैन्य जीवन उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने भारतीय सेना में अनेक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील पदों पर रहते हुए उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय दिया। राष्ट्रसेवा और विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक , अति विशिष्ट सेवा पदक व विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। अपने राज्यपाल कार्यकाल में उन्होंने संवैधानिक दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दी। सादगी, अनुशासन और सहज व्यवहार के कारण वह व्यापक रूप से सम्मानित रहे।
उनके निधन पर पूर्व सैनिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं व विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। शोक संदेशों में उन्हें समर्पित सैनिक, कुशल प्रशासक और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताते हुए कहा गया कि उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय