विश्वविख्यात निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, देहरादून में अंतिम दर्शन के बाद काशी में होगा अंतिम संस्कार

 


-

देहरादून में जसपाल राणा के अंतिम दर्शन के बाद काशी में होगा अंतिम संस्कार

-

देहरादून, 12 जून (हि.स.)। पद्मश्री सम्मानित, विश्वविख्यात निशानेबाज और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता जसपाल राणाका दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से देहरादून लाया जाएगा और 13 जून को दोपहर 12 बजे तक देहरादून स्थित उनके नाम पर स्थापित शूटिंग रेंज में आमजन के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

खेल विभाग, खिलाड़ी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में आमजन शूटिंग रेंज पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद 13 जून को दोपहर 12 बजे पार्थिव शरीर को विशेष विमान से काशी (वाराणसी) ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिजन और खेल जगत से जुड़े लोग भी वहां उपस्थित रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले पद्मश्री सम्मानित और विश्वविख्यात निशानेबाज जशपाल राणा के निधन से पूरे देश, खेल जगत और उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को खेल जगत और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तराखंड का नाम रोशन करने के साथ भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। राज्यपाल ने कहा कि अनेक युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, कठिन परिश्रम और उल्लेखनीय उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निशानेबाजी के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा और उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को उत्कृष्टता की राह दिखाई। उन्होंने इसे उत्तराखंड, खेल जगत और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि साधारण परिवेश से निकलकर जसपाल राणा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है और खेल जगत ने एक ऐसा सितारा खो दिया है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि देवभूमि की माटी के लाल और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित जसपाल राणा का असामयिक निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाने के साथ उन्होंने कोच के रूप में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार कर खेल जगत को अमूल्य योगदान दिया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि जसपाल राणा का निधन खेल जगत, समाज और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी उपलब्धियां और योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्क्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि निशानेबाजी में देश का गौरव रहे जसपाल राणा का आकस्मिक निधन प्रदेश और देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को प्रेरित करने और देश का मान बढ़ाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती,महासचिव रामलाल खंडूड़ी एवं केशव उनियाल ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का जाना उत्तराखंड के लिए बड़ा झटका है। संगठन ने कहा कि उन्होंने अपने खेल जीवन और प्रशिक्षण के माध्यम से अनेक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया तथा देश का गौरव बढ़ाया। उनके सपनों को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जसपाल राणा को देश के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों में गिना जाता था। खिलाड़ी, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में उनकी पहचान राष्ट्रीय सीमाओं से परे थी। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।

सादगी ऐसी कि लगा ही नहीं इतने बड़े खिलाड़ी हैं -जगत रमोला मशहूर निशानेबाज जसपाल राणा के निधन की खबर से नजदीकी फफरोग गांव के उनके बचपन के जिगरी दोस्त जगत रमोला ने नम आंखों से उन्हें याद करते हुए कहा कि जसपाल जब भी गांव आते थे, तो खूब हंसी-मजाक करते थे और दोस्तों के साथ पुराने दिनों की तरह समय बिताते थे।

उन्होंने बताया कि जसपाल राणा को बद्रीगाड़ की मछली बेहद पसंद थी। खाने-पीने को लेकर उनके कोई नखरे नहीं थे। चटनी और रोटी में भी वे उतना ही आनंद लेते थे जितना किसी विशेष व्यंजन में। उनकी सादगी ऐसी थी कि देश-दुनिया में नाम कमाने के बावजूद गांव में वे बिल्कुल सामान्य व्यक्ति की तरह रहते थे। जगत रमोला ने भावुक होकर कहा कि लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे, लेकिन हमें कभी महसूस नहीं हुआ कि वह इतने बड़े खिलाड़ी और मशहूर शख्सियत हैं। बचपन में हम सब साथ मिलकर नदी और बद्रीपुल में नहाने जाया करते थे। आज वे सारे दिन केवल यादें बनकर रह गए हैं। अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि जसपाल अब हमारे बीच नहीं हैं, जिसके बाद फफक कर रोने लगे।

2009 में टिहरी लोकसभा से चुनाव लड़े थे जसपाल

प्रख्यात भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2009 के लोकसभा चुनाव में टिहरी लोकसभा से उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन वह हार गए। बाद में टिकट न मिलने के कारण 2012 में उन्होंने भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2009 के आम चुनावों में भाजपा के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार विजय बहुगुणा के सामने हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और कथित तौर पर विधानसभा चुनाव का टिकट न मिलने के कारण, 2012 में वह भाजपा से अलग हो गए और कांग्रेस में शामिल हो गए। जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा, जो उनके पहले कोच भी थे, एक भाजपा नेता और उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने। दिलचस्प बात यह है कि 2017 के चुनावों में जब पिता भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे, तब जसपाल ने कांग्रेस के लिए प्रचार किया था। प्रत्यक्ष राजनीति के अलावा, उन्होंने 2015-16 के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार में पारंपरिक खेलों की पहचान करने वाली समिति के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय