आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा को नया आयाम, दो माह में 52 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
-सड़क, होमस्टे और कनेक्टिविटी में सुधार से सीमांत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को मिली रफ्तार
देहरादून, 03 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को इस वर्ष अभूतपूर्व जनसमर्थन मिल रहा है। यात्रा शुरू होने के मात्र दो माह के भीतर 52,250 से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में पहुंचे 36,456 श्रद्धालुओं से कहीं अधिक है।
राज्य सरकार का इस बाबत कहना है कि सड़क, कनेक्टिविटी, आवासीय सुविधाओं और ऑनलाइन इनर लाइन परमिट व्यवस्था में किए गए सुधारों के कारण यात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। इसके बाद राज्य सरकार ने सीमांत क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए सड़क, पुल, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का तेजी से विस्तार किया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, धारचूला से आदि कैलाश तक लगभग 115 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण किया गया है। यात्रा मार्ग पर 10 नए पुलों का निर्माण भी किया गया है। इसके अलावा गेस्ट हाउस, होमस्टे और अन्य पर्यटक सुविधाओं का विस्तार कर यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
यात्रा में बढ़ोतरी का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिछले तीन वर्षों में 284 नए टैक्सी वाहनों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें 93 कैम्पर और 191 मैक्स वाहन शामिल हैं। सरकार के अनुसार धारचूला से आदि कैलाश और ओम पर्वत मार्ग पर बसे लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इस धार्मिक पर्यटन से जुड़ गई है।
सरकार का दावा है कि यात्रा ने सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा दिया है। बूंदी, कुटी, गुंजी, नाबी और नपल्च्यू गांवों में 70 से 80 परिवारों ने अपने पुराने मकानों का पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत कर उन्हें होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराया है। वर्ष 2026 में अब तक 47 नए होमस्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं, जबकि प्रदेश में कुल 827 होमस्टे संचालित हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार के साथ आदि कैलाश क्षेत्र सीमांत उत्तराखंड में रोजगार, स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और आधारभूत विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और स्थानीय लोगों की आय में भी वृद्धि हुई है।
यात्रा पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी सरकार द्वारा विकसित की गई सुविधाओं की सराहना की है। गाजियाबाद के बाइक राइडर आकाश राजपूत ने कहा कि सड़क और यात्रा मार्ग पर बेहतर व्यवस्थाओं के कारण अब बड़ी संख्या में बाइक राइडर भी आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए पहुंच रहे हैं।
कोलकाता से आए श्रद्धालु प्रभाकर ने कहा कि स्थानीय लोगों का सहयोग और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सड़क एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के कारण यात्रा पहले की अपेक्षा काफी अधिक सुगम और सुरक्षित हो गई है।
महाराष्ट्र से पहुंचीं श्रद्धालु श्रुति ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में गेस्ट हाउसों की संख्या बढ़ी है और सड़क मार्ग की स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके चलते आदि कैलाश की यात्रा अब पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक और सहज हो गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय