उज्जैन में पितरों का तर्पण करेंगी नाजिया इलाही खान, बोलीं-आस्था की कोई सीमा नहीं
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करते हुए अपने पूर्वजों को नमन करेंगी,धमकियों के बावजूद अपनी बात पर बने रहने की बात कही
इंदौर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। आस्था, परंपरा और सामाजिक पहचान से जुड़े सवालों के बीच उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता नाजिया इलाही खान ने आगामी सर्वपितृ अमावस्या पर महाकाल की नगरी उज्जैन में अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की बात कही है।
दरअसल, अपने इंदौर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि वह दस अक्टूबर को महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचकर विधि-विधान से अपने पितरों का स्मरण करेंगी। उनके इस निर्णय के साथ ही गोमूत्र सेवन और नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में प्रवेश को लेकर दिए गए उनके बयान भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।
पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता को बताया मूल भावना
नाजिया इलाही खान ने कहा कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की इच्छा उनके मन में लंबे समय से रही है। इस बार उन्होंने उज्जैन में श्राद्ध और तर्पण करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार, यह उनके लिए किसी विवाद को जन्म देने की कोशिश से अधिक अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का व्यक्तिगत अवसर है। उन्होंने अपनी मजहबी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इससे आगे बढ़कर मानवीयता का संदेश देना चाहती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब का भी उल्लेख किया और कहा कि इतिहास की किसी भी पृष्ठभूमि से अलग व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत आस्था और जीवन के फैसले स्वयं तय कर सकता है।
नाजिया ने दावा किया कि सनातन परंपराओं के समर्थन और गोमूत्र सेवन को लेकर उन्हें लगातार विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि उन्हें पाकिस्तान से भी धमकियां मिली हैं और समुदाय से बाहर किए जाने की बातें कही गई हैं। उन्होंने कहा कि इन धमकियों से वह अपने विचार बदलने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि जो उन्हें सही लगता है, वह उसी के पक्ष में अपनी बात रखती रहेंगी।
गोमूत्र सेवन पर खुलकर रखा अपना पक्ष
गोमूत्र को लेकर नाजिया इलाही खान ने कहा कि वह स्वयं इसका नियमित सेवन करती हैं और उनके अनुभव में कहा कि इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है। उन्होंने लोगों को भी इसके सेवन की सलाह दी। इसके साथ ही नवरात्रि के गरबा आयोजनों को लेकर नाजिया ने सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मां की आराधना से जुड़े धार्मिक आयोजनों में मुस्लिम युवकों की मौजूदगी का उद्देश्य क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग गरबा आयोजनों के माध्यम से हिंदू युवतियों को निशाना बनाने का प्रयास कर सकते हैं और इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़कर चिंता जताई।
नाजिया ने गरबा आयोजकों और हिंदू संगठनों से अपील की कि आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए तथा प्रवेश से पहले पहचान-पत्रों की जांच की जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे आयोजनों को प्रभावित करने के लिए सीमा पार से साजिशें रची जाती हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के लिए उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
सर्वपितृ अमावस्या हिंदू परंपरा में पितरों के स्मरण और तर्पण का महत्वपूर्ण अवसर है। इसी दिन उज्जैन में नाजिया इलाही खान द्वारा अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध करने की घोषणा ने इस व्यक्तिगत निर्णय को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। अब उनका यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब देश में आस्था, धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है। उनका कहना है कि उनके लिए पूर्वजों का सम्मान किसी धार्मिक सीमा से अधिक मानवीय कर्तव्य का विषय है।
उल्लेखनीय है कि नाजिया के इस निर्णय को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उज्जैन पितृकर्म के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका महत्व बिहार के गया तीर्थ के समान माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान तथा पूजन करते हैं।मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए पितृ कर्म से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस संबंध में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु के दिवंगत पुत्रों के निमित्त उज्जैन में ही तर्पण कराया था। वजह है कि उज्जैन में पितृ कर्म को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था गहरी है। पितृ पक्ष के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले अनेक श्रद्धालु महाकाल दर्शन के साथ (गयाकोटा) जाकर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी