तमिलनाडु विधानसभा सत्र : मुख्यमंत्री विजय के अंदाज, सत्ता-विपक्ष की नई तस्वीर और अन्नाद्रमुक की अंदरूनी कलह बनी चर्चा का केंद्र

 


चेन्नई, 11 मई (हि.स.)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद गठित 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ। नई सरकार के गठन के बाद आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में कुछ ए को छोड़कर सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता और विपक्ष के नए राजनीतिक समीकरणों के साथ-साथ अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) में बढ़ती अंदरूनी खींचतान भी चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही।

प्रोटेम स्पीकर करुप्पैय्या ने सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि जो विधायक किसी कारणवश सोमवार को शपथ नहीं ले सके, उन्हें मंगलवार को शपथ ग्रहण का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव मंगलवार को कराया जाएगा। इसके बाद दिनभर की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में फिलहाल एक सीट रिक्त है। तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से विधायक चुने गए जोसेफ विजय के इस्तीफे के बाद सदन में 233 विधायक मौजूद रहे। इसके बाद सभी निर्वाचित सदस्यों ने विधिवत शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की।

विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को अपने निर्वाचन प्रमाणपत्र साथ लाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि मंत्री कीर्तना अपना विजय प्रमाणपत्र लाना भूल गईं, जिसके कारण वह विधायक के रूप में शपथ नहीं ले सकीं। वहीं के.सी. करुप्पनन भी गलत प्रमाणपत्र लेकर पहुंचने की वजह से शपथ प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।

इस बीच तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय एक बार फिर अपने पहनावे को लेकर चर्चा में रहे। मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान उन्होंने पारंपरिक सफेद शर्ट और वेष्टी के बजाय काले रंग का आधुनिक कोट-सूट पहनकर सबका ध्यान आकर्षित किया था। सोमवार को विधानसभा सत्र में भी वह उसी अंदाज में नजर आए।

दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से पारंपरिक परिधान का प्रभाव रहा है, लेकिन विजय की “पावर ड्रेसिंग” शैली को आधुनिक राजनीतिक छवि के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा में उनके काले कोट-सूट की चर्चा राजनीतिक गलियारों में पूरे दिन होती रही।

विधानसभा सत्र का सबसे दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन सदन में आमने-सामने बैठे दिखाई दिए। एक ओर सरकार का नेतृत्व कर रहे युवा मुख्यमंत्री थे, तो दूसरी ओर सरकार को घेरने की जिम्मेदारी संभाल रहे विपक्ष के नेता। लगभग समान आयु वर्ग के इन दोनों नेताओं की मौजूदगी ने तमिलनाडु की राजनीति में नई पीढ़ी के नेतृत्व और भविष्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया।

उधर, विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद प्रमुख विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है और अन्नाद्रमुक अब विभाजन के संकट से जूझती नजर आ रही है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलग वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर पार्टी दो धड़ों में बंट गई है। 47 सीटें जीतने वाली अन्नाद्रमुक के लगभग 36 विधायक एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये विधायक विश्वास मत के दौरान विजय सरकार का समर्थन करने के पक्ष में हैं।

बागी गुट का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन पार्टी की हार का बड़ा कारण बना। इसी वजह से कई विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर टीवीके सरकार को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

अन्नाद्रमुक में विधायक दल के नेता के चयन को लेकर भी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ईपीएस समर्थकों और बागी गुट के बीच तीखी खींचतान जारी है, जिसके कारण अब तक विधायक दल के नेता का आधिकारिक चयन नहीं हो सका है।

हालांकि, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता बनाए रखने के समर्थन में 17 विधायकों ने विधानसभा सचिव और अस्थायी अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV