उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी पर भड़के एम.के. स्टालिन, विजय सरकार पर लगाया लोकतंत्र कुचलने का आरोप

 




चेन्नई, 04 अगस्त (हि.स.)। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर राज्य की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि अहंकार सत्ता के विनाश का कारण बनता है और लगातार बना रहने वाला अहंकार उसके पतन को और तेज कर देता है।

स्टालिन ने जारी बयान में आरोप लगाया कि कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि इन जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, तंजावुर में द्रमुक की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में किसानों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों की बड़ी भागीदारी ने सरकार के प्रति जनता के आक्रोश को उजागर किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन द्वारा सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को उठाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके आवास पर पुलिस भेजी गई और उन्हें गिरफ्तार कर तंजावुर ले जाया गया। स्टालिन ने सवाल उठाया कि यदि केवल पूछताछ करनी थी तो उसे चेन्नई में भी किया जा सकता था। ऐसे में उन्हें दूसरे शहर ले जाने और कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की क्या आवश्यकता थी।

द्रमुक अध्यक्ष ने कहा कि अगले दिन विधानसभा का सत्र प्रस्तावित था, जिसमें वित्तीय बजट पेश किया जाना था। ऐसे समय में विपक्ष के नेता का सदन में उपस्थित रहना आवश्यक था, लेकिन सरकार ने उन्हें सदन से दूर रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की।

एम.के. स्टालिन ने दावा किया कि राज्यभर में द्रमुक कार्यकर्ताओं और आम जनता के विरोध के बाद सरकार को अदालत में यह कहना पड़ा कि उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजने का कोई इरादा नहीं है और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पूछताछ के बाद तत्काल रिहाई का निर्देश सरकार की कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर यह भी आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से उनकी सरकार आलोचकों के खिलाफ लगातार दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों, विपक्षी नेताओं और आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विधायक अनीता राधाकृष्णन और मार्कंडेयन के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई।

स्टालिन ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के विरोध में छात्रों और युवाओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन तक नहीं करने दिया गया तथा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने चेन्नई के मरीना बीच को बंद किए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और कहा कि किसानों के आंदोलनों को भी विपक्ष की साजिश बताकर बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के विरोध में आयोजित द्रविड़र कड़गम की वाहन रैली को अनुमति नहीं दी गई और किसानों के समर्थन में भाषण देने वाले उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की गई।

द्रमुक अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर समर्थन देने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आभार व्यक्त किया। साथ ही, बिना तथ्यों की पुष्टि किए उदयनिधि स्टालिन की आलोचना करने वाले नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उदयनिधि ने अपने भाषण में किसी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी नहीं की और न ही किसी का नाम लिया। उनका आरोप था कि उदयनिधि के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया।

स्टालिन ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन एक जिम्मेदार नेता हैं और यदि उनसे कभी अनजाने में कोई गलती हो भी जाए, तो उसे स्वीकार कर माफी मांगने का साहस रखते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्रचार के बजाय जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

अपने बयान के अंत में एम.के. स्टालिन ने आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए द्रमुक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई और कहा कि अहंकार अंततः सत्ता के पतन का कारण बनता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV