चेन्नई हाई कोर्ट का फिल्म ‘जननायकन’ को तुरंत यू/ए प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश,
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-अभिनेता विजय के प्रशंसकों में खुशी की लहर
चेन्नई, 09 जनवरी (हि.स.)। चेन्नई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को अभिनेता विजय की फिल्म ‘जननायकन’ को तत्काल यू/ए प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से अभिनेता विजय के प्रशंसकों और फिल्म जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। न्यायमूर्ति बी.टी. आशा ने फैसला सुनाते हुए सीबीएफसी को ‘जननायकन’ को तत्काल यू/ए प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।
दरअसल, अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म के रूप में प्रचारित ‘जननायकन’ को पोंगल पर्व के उपलक्ष्य में आज (09 जनवरी) को रिलीज़ किया जाना था। रिलीज से पहले फिल्म को दिसंबर के तीसरे सप्ताह में सेंसर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। उस समय बोर्ड की ओर से मौखिक रूप से यह बताया गया कि फिल्म में मौजूद 14 कथित विवादित दृश्यों को हटाने के बाद ही यू/ए प्रमाणपत्र दिया जाएगा। निर्माता पक्ष ने सभी निर्देशों का पालन करते हुए संशोधित संस्करण दोबारा बोर्ड को सौंप दिया, लेकिन इसके बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया और फिल्म को पुनः परीक्षण के लिए भेज दिया गया।
इससे असंतुष्ट फिल्म से जुड़ी टीम ने चेन्नई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई 7 जनवरी को हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सेंसर बोर्ड से कई अहम सवाल किए। न्यायालय ने पूछा कि 22 दिसंबर को फिल्म देखने वाली चार सदस्यीय समिति के एक सदस्य द्वारा 29 दिसंबर को दी गई शिकायत कैसे स्वीकार्य हो सकती है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब यू/ए प्रमाणपत्र देने का निर्णय हो चुका था, तो फिल्म को दोबारा समीक्षा के लिए क्यों भेजा गया और इसकी जानकारी निर्माता कंपनी को तत्काल न देकर 5 जनवरी को क्यों दी गई।
अदालत के सवाल पर सेंसर बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि यदि समीक्षा समिति की सिफारिशों से संतोष नहीं होता है, तो बोर्ड के अध्यक्ष को नौ सदस्यीय पुनः समीक्षा समिति गठित करने का अधिकार है। बोर्ड ने यह भी तर्क दिया कि फिल्म में भारतीय सुरक्षा बलों से जुड़े कुछ प्रतीकों का उपयोग किया गया है, इसलिए सुरक्षा विशेषज्ञों से परामर्श आवश्यक था।
वहीं निर्माता कंपनी ने अदालत में कहा कि पहली समीक्षा समिति ने सर्वसम्मति से फिल्म को प्रमाणित करने की सिफारिश की थी। नियमों के अनुसार, बहुमत न होने की स्थिति में ही पुनः समीक्षा संभव है। ऐसे में एक सदस्य द्वारा बहुमत के निर्णय को निरस्त करना नियमों के खिलाफ है।
रिलीज़ को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते के.वी.एन. प्रोडक्शंस ने 09 जनवरी को प्रस्तावित फिल्म रिलीज़ टालने की घोषणा भी कर दी थी।
मामले में आज न्यायमूर्ति बी.टी. आशा ने फैसला सुनाते हुए सीबीएफसी को ‘जननायकन’ को तत्काल यू/ए प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब पहली समिति ने कोई तत्काल आपत्ति दर्ज नहीं की थी, तो बोर्ड अध्यक्ष को फिल्म को पुनः समीक्षा समिति के पास भेजने का अधिकार नहीं था।
हालांकि, इस आदेश के खिलाफ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने चेन्नई उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश पीठ में अपील दायर कर दी है। मुख्य न्यायाधीश पीठ ने कहा है कि अपील दाखिल होने पर दोपहर बाद उसकी सुनवाई पर विचार किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV