टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल से तेलंगाना में बस सेवाएं ठप, लाखों यात्री प्रभावित
हैदराबाद, 22 अप्रैल (हि.स.)। तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू किए जाने से पूरे राज्य में बस सेवाएं ठप हो गई हैं। मंगलवार आधी रात से शुरू हुई इस हड़ताल का असर बुधवार सुबह से ही साफ दिखाई देने लगा, जब राज्यभर के डिपो से बसों का संचालन पूरी तरह बंद हो गया और अधिकांश बसें सड़कों पर नहीं उतरीं। इससे यात्रा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच वार्ता विफल रहने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किए गए वैकल्पिक इंतजाम भी नाकाम साबित हो रहे हैं। हालांकि, सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार और समाधान के लिए एक समिति गठित की है।
राजधानी हैदराबाद में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। बसों के सड़कों से गायब होने के कारण मेट्रो स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है और लाखों यात्री बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। स्थिति को देखते हुए हैदराबाद मेट्रो रेल ने एलटीएमआरएचएल के साथ परामर्श कर मेट्रो सेवाओं के फेरे बढ़ाने का निर्णय लिया है। हड़ताल के दौरान पीक और नॉन-पीक घंटों में कुल 56 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद कई स्टेशनों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है।
इधर, आरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने चेतावनी दी है कि यदि हड़ताल तोड़ने का कोई प्रयास किया गया तो डिपो से बसों को बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। इसके जवाब में गृह विभाग ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख बस डिपो पर करीब 5,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया है।
हड़ताल का सबसे अधिक असर महिलाओं, छात्रों और दैनिक कामकाजी लोगों पर पड़ा है। अकेले हैदराबाद में प्रतिदिन करीब 14.2 लाख महिलाएं मुफ्त बस यात्रा का लाभ उठाती हैं, जो अब प्रभावित हो गई हैं। बस सेवाएं बंद रहने के कारण लोगों को निजी परिवहन जैसे कैब और ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। परिवहन विभाग की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल के दौरान ऑटो किराए को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो सकता है, जिससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
इस बीच, राज्य के परिवहन मंत्री पोनम प्रभाकर ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों का समाधान किया जाएगा। मंत्री के अनुसार, कर्मचारियों की 32 मांगों में से 29 पर सरकार सहमत है और उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा, जबकि शेष दो प्रमुख मांगें—आरटीसी का सरकार में विलय और यूनियन की मान्यता व चुनाव—तकनीकी जांच से जुड़ी हैं। इन पर समिति की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने 2017 पीआरसी, महंगाई भत्ता (डीए) और पूर्व के बांड से संबंधित लंबित भुगतान निपटा दिए हैं। साथ ही प्रोविडेंट फंड बकाया में कमी लाई गई है और नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 4,538 श्रमिकों की भर्ती और 1,134 अनुकंपा नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जारी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आरटीसी सेवाएं ग्रामीण और गरीब वर्ग के लिए जीवनरेखा हैं, जिनका प्रतिदिन लगभग 65 लाख लोग उपयोग करते हैं, जिनमें 45 लाख महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में बस सेवाओं का ठप होना आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj