तरुण चुघ ने पंजाब के राज्यपाल को लिखा पत्र, भगवंत मान की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की

 


नई दिल्ली, 24 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पत्र की प्रति पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को भी भेजी गई है।

मीडिया से बात करते हुए

तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा शर्मनाक और अमर्यादित दौर आया हो, जब एक मौजूदा मुख्यमंत्री पहले गुरुओं का अपमान करता है। फिर श्रीअकाल तख्त साहिब के सचिवालय में जाकर झूठ बोलता है और उसके बाद स्वयं श्रीअकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का दुस्साहस करता है।

चुघ ने कहा कि वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि भगवंत मान ने सिख गुरुओं के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक, अमर्यादित और अस्वीकार्य बेदबी वाला व्यवहार किया। जब पूरी दुनिया में बसे सिख समुदाय एवं नानक नाम लेवा संगत की भावनाएं आहत हुईं, तब श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें स्पष्टीकरण का अवसर दिया, लेकिन उन्होंने सत्य स्वीकार करने के बजाय यह दावा किया कि वीडियो एआई से तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि श्रीअकाल तख्त साहिब द्वारा दो फॉरेंसिक एजेंसियों के नाम देने का अवसर दिए जाने के बावजूद भगवंत मान ने सहयोग नहीं किया। बाद में स्वतंत्र जांच के बाद जब सच्चाई सामने आई तो उन्हें 'गुरु-दोखी' और 'पंथ-विरोधी' घोषित किया गया तथा सामाजिक बहिष्कार का आदेश जारी किया गया।

तरुण चुघ ने कहा कि सरकारी मशीनरी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, धनबल और कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया और झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट बना कर तख्त साहिब को चुनौती दे दी। यदि आरोप सही हैं तो यह केवल सत्ता का दुरुपयोग नहीं, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का सुनियोजित षड्यंत्र है।

चुघ ने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा पारित एवं लागू किए गए 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' की कार्यवाही भगवंत मान के विरुद्ध होनी चाहिए। कानून केवल आम नागरिकों के लिए नहीं हो सकता और मुख्यमंत्री किसी भी परिस्थिति में कानून से ऊपर नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा कि भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से तत्काल हटाना और उन्हें गिरफ्तार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पद पर बने रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। सरकारी मशीनरी पर उनका नियंत्रण जांच को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रह सकती है।

तरुण चुघ ने पंजाब की जनता, सिख संगतों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और लोकतांत्रिक शक्तियों से आह्वान किया कि 'गुरु-दोखी' और 'पंथ-विरोधी' भगवंत मान का पूर्ण सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक सत्य पूरी तरह सामने नहीं आता और न्याय नहीं होता, तब तक उन्हें किसी भी सार्वजनिक मंच, धार्मिक आयोजन अथवा सामाजिक कार्यक्रम में नहीं शामिल किया जाना चाहिए।

चुग ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है। यह पंजाब की आत्मा, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और सिख आस्था की रक्षा का संघर्ष है। पंजाब किसी व्यक्ति से बड़ा है और श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा किसी भी राजनीतिक कुर्सी से कहीं अधिक बड़ी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी