स्वामी स्वरूपानंद की नई पुस्तक 'यू आर द स्काई' का लोकार्पण, वेदांत और मनोविज्ञान से भावनाओं को समझने का प्रयास

 




नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद ने बुधवार को यहां इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी नई पुस्तक ‘यू आर द स्काई : एन एंशिएंट गाइड टू मॉडर्न फीलिंग्स’ का लोकार्पण किया। पुस्तक में वेदांत दर्शन और आधुनिक मनोविज्ञान के जरिए गुस्सा, डर, जलन, अपराधबोध और उदासी जैसी भावनाओं को समझने की कोशिश की गई है। प्रकाशक पैन मैकमिलन इंडिया के अनुसार, औपचारिक लोकार्पण से पहले ही पुस्तक की करीब सात हजार प्रतियां बिक चुकी थीं।

कार्यक्रम में स्वामी स्वरूपानंद ने फिल्मकार और टॉक शो प्रस्तोता विनय भारद्वाज के साथ बातचीत की। इस दौरान भावनाओं को समझने और उनके प्रभाव में आकर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के राजनयिक, वरिष्ठ अधिवक्ता, कारोबारी, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक, कलाकार, शिक्षाविद और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए।

स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि भावनाएं जीवन को समृद्ध बनाती हैं, लेकिन उन्हें दबाने या बिना सोचे प्रतिक्रिया देने से मन की शांति प्रभावित होती है। पुस्तक प्राचीन वेदांत ज्ञान को आधुनिक मनोविज्ञान से जोड़कर यह समझने में मदद करती है कि भावनाओं को महसूस करने के बावजूद व्यक्ति अपनी पहचान और फैसलों को उनसे पूरी तरह प्रभावित होने से कैसे बचा सकता है।

पुस्तक में आकाश और उससे गुजरते बादलों का उदाहरण दिया गया है। जिस तरह बादलों के आने-जाने से आकाश का मूल स्वरूप नहीं बदलता, उसी तरह भावनाएं भी आती-जाती रहती हैं। उन्हें व्यक्ति की संपूर्ण पहचान नहीं माना जाना चाहिए। पुस्तक में सकारात्मक भावनाओं के साथ गुस्सा, डर, जलन, अपराधबोध और उदासी जैसी मनःस्थितियों को भी समझने पर जोर दिया गया है।

पैन मैकमिलन इंडिया की संपादकीय निदेशक पूजिता कृष्णन ने कहा कि पुस्तक वेदांत की शिक्षाओं को शरीर-विज्ञान, तंत्रिका-विज्ञान और मनोविज्ञान की आधुनिक समझ से जोड़ती है। लोकार्पण से पहले करीब सात हजार प्रतियों की बिक्री पुस्तक के प्रति पाठकों की रुचि को दर्शाती है।

उल्लेखनीय है कि चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन इस वर्ष अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ मना रहा है। इसका समापन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले चिन्मय वैश्विक सम्मेलन के साथ होगा।

स्वामी स्वरूपानंद को वर्ष 1985 में स्वामी चिन्मयानंद ने संन्यास की दीक्षा दी थी। वह दुनिया भर में चिन्मय मिशन के 350 से अधिक केंद्रों का नेतृत्व करते हैं। उनकी अन्य पुस्तकों में ‘स्टॉर्म टू परफॉर्म’, ‘मेडिटेशन: द अवेकनिंग’ और ‘लाइफ मैनेजमेंट टेक्नीक्स’ शामिल हैं। ‘यू आर द स्काई’ प्रमुख पुस्तक दुकानों और अमेजन तथा फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी