एनआईएसडी और उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में समझौता, सामाजिक सुरक्षा मुद्दों पर क्षमता निर्माण को मिलेगी मजबूती
नई दिल्ली, 12 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) और डॉ. आर.एस. तोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (डीआरएसटीयूएओए) के बीच शुक्रवार को उत्तराखंड में मादक पदार्थों की रोकथाम और सामाजिक सुरक्षा के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) सामाजिक रक्षा मुद्दों पर सहयोगात्मक क्षमता निर्माण के लिए 'डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी' नैनीताल के साथ हस्ताक्षरित किया गया। इस ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत (आईएएस)और डीआरएसटीयूएओए के महानिदेशक बी.पी. पांडे (आईएएस) मुख्य रूप से उपस्थित थे।
दोनों संस्थानों के बीच आधिकारिक हस्ताक्षर एनआईएसडी के उप निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. एच.सी. श्रीधरा रंगा रेड्डी और डीआरएसटीयूएए के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार ने किए। इस अवसर पर अकादमी के परियोजना निदेशक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, संयुक्त निदेशक (वित्त) रिधांशु शर्मा, उप निदेशक वी.के. सिंह सहित दोनों संस्थानों के अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य भी मौजूद रहे।
एनआईएसडी के उप निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. एच.सी. श्रीधरा रंगा रेड्डी ने कहा कि इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य समाज के संवेदनशील वर्गों से जुड़ी उभरती चुनौतियों का समाधान करना है। इसके तहत कई क्षेत्रों पर विशेष कार्य किया जाएगा। इनमें मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, ट्रांसजेंडर कल्याण और पुनर्वास कार्य शामिल हैं।
इस पहल के तहत राज्य सरकार के अधिकारियों, पुलिस व जेल कर्मचारियों, गैर सरकारी संगठनों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की क्षमताओं को विकसित व मजबूत किया जाएगा।
अकादमी के महानिदेशक ने इस सहयोग का स्वागत करते हुए पूर्ण संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, अधिकारियों के मुख्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा विषयों को शामिल करने से जन-कल्याणकारी योजनाओं का अंतिम छोर तक प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
यह समझौता ज्ञापन राज्य प्रशासनिक प्रणालियों के भीतर सामाजिक सुरक्षा प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी