लालजी टंडन ने लखनऊ को जिया, समझा और अपने भीतर बसाया : राजनाथ सिंह
नानाजी देशमुख, दीनदयाल उपाध्याय और अटल जी का सानिध्य लालजी टंडन को मिला
लखनऊ,12 अप्रैल (हि.स.)। भारत सरकार के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में पूर्व राज्यपाल स्व.लालजी टण्डन की पुस्तक 'स्मृति नाद' का लोकार्पण किया। इस अवसर पर जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना व उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई नेता उपस्थित रहे।
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लालजी टंडन का जीवन हमें यह सिखाता है कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है। ऐसे जननायक, जिन्होंने लखनऊ को जिया, समझा और उसे अपने भीतर बसाया। उन्हें लोग आदर से बाबू जी कहते थे। उनकी स्मृतियाँ हमेशा इस शहर की फिज़ाओं में जीवित रहेंगी। रक्षामंत्री ने कहा कि संस्कृति से लेकर शिक्षा में सुधार तक, समाज सेवा से लेकर सामाजिक सद्भाव तक, शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां टंडन ने अपनी छाप न छोड़ी हो। लालजी टंडन पर भारत की संस्कृति और सभ्यता के मूल्यों की गहरी छाप थी। उन्होंने इस किताब में लिखा है कि ‘सेक्युलरिज्म’ शब्द का जन्म न तो भारतीय परिवेश में हुआ था, न भारत में। उनके लिए सेक्युलरिज़्म का सही अर्थ था सर्वधर्म समभाव। यानी सभी धर्मों को बराबर मान देना।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लालजी टंडन का व्यक्तित्व जितना सरल और सहज था, वे निर्णय लेने में उतने ही दृढ़ और निर्भीक थे। नगर विकास मंत्री के रूप में उन्होंने अवैध कब्जों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की थी। विरोध हुआ लेकिन टंडन जी अपने निर्णय से कभी पीछे नहीं हटे,क्योंकि उनके लिए कानून व्यवस्था और न्याय सर्वोपरि थे। मैं स्वयं को भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे उस लखनऊ का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला, जिसे लालजी टंडन ने अपने कर्म और समर्पण से सींचा और उनसे पहले अटल जी जैसे युगपुरुष ने जिसकी गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
उन्हाेंने कहा कि लखनऊ लालजी टंडन के लिए केवल एक शहर नहीं था, वह उनकी आत्मा का विस्तार था। यहाँ की गलियां, यहाँ का खान-पान, यहाँ की जीवन शैली—सब कुछ उनके मन और मस्तिष्क में बसा था। उनकी पुस्तक ‘अनकहा लखनऊ’ केवल एक किताब नहीं बल्कि इस शहर की आत्मा का दस्तावेज़ है। लालजीटंडन से, जो भी मिलता था, उनका अपना बन जाता था। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने लखनऊ को ही अपने भीतर समाहित कर लिया था। टंडन जी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन उनका जीवन केवल पद और प्रतिष्ठा की कहानी नहीं है, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा है।
रक्षामंत्री ने कहा कि लालजी टण्डन के जीवन मूल्यों पर कई महान लोगों की छाप थी और जाने कितने लोगों पर टंडन के जीवन की भी छाप पड़ी। लालजी टंडन का बचपन से लेकर युवावस्था तक का जीवन, नानाजी देशमुख, दीनदयाल उपाध्याय जी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के सानिध्य में बीता। जिससे उन्हें जीवन में कभी भी सिद्धांतों से समझौता किए बिना कार्य करने की प्रेरणा मिली। उन्हें कई प्रसिद्ध साहित्यकारों का सानिध्य भी मिला, जिसने उनके मन में साहित्य के प्रति प्रेम और रूचि पैदा की। पुस्तक की प्रस्तावना साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र ने रखी।
इस अवसर पर लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद संजय सेठ, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय चौधरी, पूर्व मंत्री डा.महेद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, एमएलसी मुकेश शर्मा, पवन सिह चौहान व विधायक डा.नीरज बोरा, योगेश शुक्ला प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन