एसआईआर लोकतंत्र पर हमला नहीं, मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की संवैधानिक प्रक्रिया : सुकांत मजूमदार
गुवाहाटी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने शनिवार को कहा कि विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) लोकतंत्र के खिलाफ कोई कदम नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था की शुद्धता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं की पहचान कर त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है।
भाजपा के असम प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा कि स्वतंत्र भारत में अब तक एसआईआर की 12 प्रक्रियाएं हो चुकी हैं। इनमें से 10 कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के कार्यकाल में आयोजित की गई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले इस प्रक्रिया को स्वीकार किया गया था, तो अब इसे लोकतंत्र पर हमला क्यों बताया जा रहा है।
मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे पर उन्होंने कहा कि इसकी सही व्याख्या जरूरी है। उनके अनुसार, इनमें 6.3 करोड़ (48.1 प्रतिशत) संभावित रूप से स्थायी रूप से स्थानांतरित, तीन करोड़ (22.9 प्रतिशत) सत्यापन के दौरान अनुपस्थित, 2.8 करोड़ (21.4 प्रतिशत) मृत और एक करोड़ (7.6 प्रतिशत) दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मसौदा सूची में जांच के लिए चिह्नित नामों को अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या बताना भ्रामक है।
मजूमदार ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन राज्यों में भी बड़ी संख्या में मृत और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान की गई है। उन्होंने सवाल किया कि मृत और दोहरे पंजीकरण वाले नामों को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस पर एसआईआर को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपाय और कानूनी प्रावधान किए गए हैं। बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की ओर से तीन बार घर-घर जाकर सत्यापन, 20 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंटों की भागीदारी, मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर तथा अपील की व्यवस्था इनमें शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के फैसले के खिलाफ मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर तक अपील की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में 60 लाख से अधिक विवादित नामों के पुनरीक्षण के लिए 700 से अधिक कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है।
नए मतदाताओं के पंजीकरण का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जून 2025 से 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2.37 करोड़ मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है।
मजूमदार ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई राज्यों में पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है और उसका चुनावी पतन एसआईआर से काफी पहले शुरू हो चुका था। ऐसे में प्रत्येक चुनावी हार के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल का दायित्व है कि वह मतदाताओं के फैसले का सम्मान करे और संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखे। उन्होंने कहा, ''दुष्प्रचार नहीं, तथ्यों के साथ बात करें; अराजकता नहीं, संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करें।''
संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश मीडिया विभाग के संयोजक देवान ध्रुवज्योति मरल और प्रदेश प्रवक्ता मानस शरणिया भी उपस्थित थे।----------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश