सीआईए ने 1998 के वंधामा हत्याकांड की जांच फिर से शुरू की
गांदरबल, 27 अगस्त (हि.स.)। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) ने 1998 के वंधामा हत्याकांड की जांच फिर से शुरू कर दी है, जिसमें जम्मू और कश्मीर के गांदरबल जिले में 23 कश्मीरी पंडितों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के वंधामा गांव में 25 जनवरी, 1998 को सेना की वर्दी में आतंकवादियों का एक ग्रुप गांव में आया। उन्होंने लोगों से बातचीत की और पंडित परिवारों को एक जगह इकट्ठा होने के लिए कहा। इसके बाद कश्मीरी पंडित परिवारों के घरों में घुस गए और फिर फायरिंग करके नौ महिलाओं और चार बच्चों सहित 23 लोगों की हत्या कर दी। इनमें चार ऐसे परिवार थे, जो 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद शुरू होने के बावजूद यहां से कहीं नहीं गए और घाटी में ही रह गए थे।
इस सिलसिले में गांदरबल पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन यह केस लगभग तीन दशकों से अनसुलझा है। पुलिस के मुताबिक यह हत्याकांड लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों ने किया था। अधिकारियों ने कहा कि जांच को फिर से खोलना उन आतंकी मामलों की फिर से जांच करने की कोशिश का हिस्सा है, जो अनसुलझे रह गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जांच का मकसद आतंकवादियों और उनकी मदद करने वाले लोगों की पहचान करना है।
हाल ही में एजेंसी ने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या की अपनी जांच पूरी की। सीआईए ने 737 पेज की चार्जशीट फाइल की, जिसमें प्रतिबंधित जेकेएलएफ के यासीन मलिक को अप्रैल, 1990 में नर्स की किडनैपिंग और मर्डर का मुख्य आरोपित बनाया गया।
इस महीने की शुरुआत में सीआईए ने अनंतनाग के कोकरनाग इलाके के सोफ शाली के रहने वाले कश्मीरी पंडित लेखक और सोशल वर्कर सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल के 1990 के डबल मर्डर केस के सिलसिले में केंद्र शासित प्रदेश में कई जगहों पर छापे मारे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह