बापू हमारे विचारों में हैं, कांग्रेस की राजनीति में : शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 17 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यसभा में कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बापू हमारे विचारों, भावनाओं और अंतरात्मा में हैं, भाजपा की पंचनिष्ठाओं में हैं, लेकिन कांग्रेस के पास न नीति है, न नेता, न नीयत, और मनरेगा के नाम पर ‘महासंग्राम’ करने वाले दो–चार महामज़दूरों से ज़्यादा देश उनके साथ नहीं है। मंगलवार को राज्य सभा में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज को लेकर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि “बापू हमारे विचारों में हैं और कांग्रेस की राजनीति में है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह ने डेढ़ घंटे से ज्यादा के अपने भाषण में कहा कि बापू ने आज़ादी के बाद कांग्रेस को भंग करने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस को जीवित रखा गया ताकि आज़ादी की पूंजी एक पार्टी के खाते में जमा हो सके। देश का विभाजन और 1975 का आपातकाल, दोनों को उन्होंने गांधी के विचारों की हत्या बताया और कहा कि अगर किसी ने बापू की बात नहीं मानी, तो वह कांग्रेस का तत्कालीन नेतृत्व था। कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीधा हमला करते हुए कहा कि आज कांग्रेस के पास न नीति है, न नेता है और न ही नीयत। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री बजट में प्रावधान करता है, दूसरा मुख्यमंत्री उसी पार्टी का होकर प्रावधान नहीं करता– न लाइन है, न नेतृत्व है, न विचार की स्पष्टता।उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई है जैसे “एक दिल के टुकड़े हज़ार हुए, कोई इधर गिरा, कोई उधर गिरा।” पार्टी गुटों में टूटकर राज्यों में बिखर चुकी है, और दिल्ली में बैठे नेतृत्व को यह भी समझ नहीं कि उसकी अपनी सरकारें विकसित भारत–जी राम जी जैसी योजनाओं पर क्या लाइन ले रही हैं।
विकसित भारत–जी राम जी को “मनरेगा का अपग्रेड” बताते हुए कहा कि यह योजना 100 दिन की जगह 125 दिन के वैधानिक रोजगार की गारंटी, बेहतर मेहनताना, बेरोजगारी भत्ता और देरी पर ब्याज जैसी कानूनी सुरक्षा के साथ किसान और मजदूर दोनों के हित को संतुलित करती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने विकसित भारत- जी राम जी योजना के लिए केंद्रीय बजट में अब तक का सबसे बड़ा प्रावधान 95,692 करोड़ रुपये किया है, जो सिर्फ केंद्र का हिस्सा है। चौहान ने राज्यवार प्रावधान गिनाते हुए कहा कि झारखंड, केरल, पंजाब, जम्मू–कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम, मेघालय, गुजरात, त्रिपुरा, हरियाणा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, गोवा और महाराष्ट्र – लगभग हर राज्य ने अपने बजट में जी राम जी के लिए राशि रख दी है,जिनमें कांग्रेस या अन्य दलों की सरकारें भी हैं।
कांग्रेस के “एक परिवार”–केंद्रित नामकरण पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने रिकॉर्ड दिखाते हुए कहा कि सैकड़ों सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों, राष्ट्रीय पार्कों, म्यूज़ियम, एयरपोर्ट–बंदरगाहों, सड़कों, इमारतों, पुरस्कारों, संस्थानों, मेडिकल–शैक्षणिक संस्थाओं, खेल ट्रॉफियों और राज्य सरकार की योजनाओं तक पर स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम चिपकाए गए हैं।
शिवराज सिंह ने कहा कि विपक्ष को गांधी के नाम से नहीं, राम के नाम से तकलीफ है। एक योजना का नाम 'विकसित भारत- जी राम जी’ रख दें तो परेशानी हो जाती है, लेकिन एक परिवार के नाम पर 600 योजनाएं चलें, यह बिलकुल सामान्य लगता है। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों “लखपति दीदी” स्व–सहायता समूहों के जरिए बैंक लिंकेज, उद्यमिता, “ड्रोन दीदी”, “कृषि सखी”, “बैंक सखी”, “पशु सखी” जैसे मॉडल से आगे बढ़ रही हैं, और लक्ष्य अब 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने बताया कि विभिन्न टीमों और सोशल ऑडिट की रिपोर्ट में मजदूरों की जगह मशीनों से काम, ठेकेदार–केन्द्रित काम, एक काम के कई टुकड़े कर ठेके बांटना, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी मस्टररोल और पैसे की बंदरबांट जैसे गंभीर आरोप सामने आए। केंद्र की टीमों ने राज्य सरकार से गड़बड़ियाँ रोकने को कहा, लेकिन जब सुधार नहीं हुआ और हाईकोर्ट की शर्तों को भी “फाड़कर फेंक दिया गया”, तब मनरेगा फंड पर रोक लगानी पड़ी।
शिवराज सिंह ने न्यू इंडिया की वैश्विक साख के उदाहरण देते हुए कहा कि गैस–तेल संकट हो या रूस–यूक्रेन युद्ध, भारत के प्रधानमंत्री का एक फोन आज दुनिया की बड़ी–बड़ी शक्तियों को भी भारत के हितों पर विचार करने को मजबूर कर देता है; तिरंगा लेकर निकलने पर दोनों पक्षों ने युद्धविराम किया और भारत के बच्चों को सुरक्षित रास्ता दिया, यह नया भारत है। स्वामी विवेकानंद जी के कथन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, “एक नरेंद्र– स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि अंधेरी रात खत्म होने को है, भारत माता अंगड़ाई लेकर खड़ी हो रही है; दूसरा नरेंद्र– नरेंद्र दामोदरदास मोदी उस स्वप्न को साकार करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि एक वैभवशाली, आत्मनिर्भर, शक्तिशाली और विकसित भारत का निर्माण अब कोई नहीं रोक सकता– “जो साथ देगा, उसके साथ; जो नहीं देगा, उसके बिना; और जो विरोध करेगा, उसके बावजूद विकसित भारत बनकर रहेगा।”
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी