शिवराज सिंह की पुस्तक ‘अपनापन’ का लोकार्पण, वेंकैया नायडू सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री रहे मौजूद

 




नई दिल्ली, 26 मई (हि.स.)। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को एक समारोह में केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का लोकार्पण किया। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, कार्यशैली और उनके साथ बिताए गए 35 वर्षों के अनुभवों पर लिखी है। पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि जब कभी प्रधानमंत्री पद को लेकर चर्चा होती थी, तब वे कहा करते थे कि “मोदी” का अर्थ है “मेकिंग ऑफ डेवलप्ड इंडिया” और आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें यह भाव प्रत्यक्ष दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की पहचान विश्व मंच पर अधिक सशक्त हुई है। वेंकैया नायडू ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि भारतीय सभ्यता, भारतीयता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को वैश्विक स्तर पर नई स्वीकृति मिली है।

पद्म पुरस्कारों का उल्लेख कर वेंकैया नायडू ने कहा कि पहले ऐसे सम्मानों को अक्सर कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित वर्गों तक सीमित समझा जाता था लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी की सोच “रिकॉग्नाइज द अनरिकॉग्नाइज्ड” की है, यानी उन साधारण लोगों को भी सम्मान दिया जा रहा है जिन्होंने चुपचाप समाज और राष्ट्र के लिए असाधारण योगदान दिया है। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब किसानों जैसे मेहनतकश लोगों को भी राष्ट्रीय सम्मान मिलने लगे हैं और यह बदलती सोच भारत के सामाजिक सम्मान-क्रम को अधिक न्यायपूर्ण बनाती है। यह नेतृत्व का वही रूप है जो राष्ट्र निर्माण में सामान्य जन की भूमिका को केंद्र में रखता है।

वेंकैया नायडू ने रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब वरिष्ठ नेता अनौपचारिक चर्चा में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रहे थे, तब उन्होंने शिवराज सिंह चौहान का नाम सुझाया था। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सामूहिक सहमति से लिया गया यह निर्णय पूरी तरह सही सिद्ध हुआ। वेंकैया नायडू ने कहा कि उस समय कुछ लोगों को आशंका थी कि मध्य प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में शिवराज सिंह चौहान को कठिनाई हो सकती है लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार, सादगी, सेवा और संवाद से सबका विश्वास जीत लिया। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह ने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और परिवारों के बीच गहरा भरोसा अर्जित किया और ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ जैसी पहल उनके जन-संवेदनशील नेतृत्व का बड़ा उदाहरण बनी। यही कारण है कि मध्य प्रदेश की जनता उन्हें “मामा” कहती है और यह संबोधन केवल लोकप्रियता का नहीं बल्कि आत्मीयता, विश्वास और संरक्षण के भाव का प्रतीक है। किसी नेता को जनता अगर रिश्ते के नाम से पुकारे तो वह उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक पूंजी होती है।

पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा गाँवों, खेतों, श्रम और साधारण जन के जीवनानुभवों से बनती है इसलिए ऐसा नेतृत्व सबसे अधिक प्रभावशाली होता है जो इस धरातल को समझता हो। कोई भी व्यक्ति तभी जननेता बनता है जब वह जनता की भाषा, उनकी चिंता और उनके जीवन-संघर्ष को भीतर से महसूस करता हो। उन्होंने ‘अपनापन’ को नेतृत्व के उसी जीवंत, मानवीय और लोकाभिमुख स्वरूप का विस्तार बताया।

देवेगौड़ा ने यह भी कहा कि किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व की वास्तविक ताकत उसके भीतर की करुणा, धैर्य और सेवाभाव में होती है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मौके पर कहा कि किसी बड़े नेता को समझने के लिए केवल उसकी उपलब्धियां देखना पर्याप्त नहीं होता; यह भी देखना आवश्यक है कि वह सामान्य कार्यकर्ता, किसान, गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के साथ किस प्रकार का व्यवहार करता है। उनके वक्तव्य में यह भाव उभरकर आया कि ‘अपनापन’ नेतृत्व का वह गुण है जो व्यक्ति को भीड़ में अलग बनाता है और जनसामान्य को यह अनुभव कराता है कि सत्ता के शिखर पर बैठा व्यक्ति भी उनके जीवन की धड़कनों से जुड़ा है।

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि लंबे समय तक साथ रहने और कार्य करने से किसी भी व्यक्ति के वास्तविक जीवन-मूल्यों की पहचान होती है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि वर्षों के अनुभव में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि कौन व्यक्ति सार्वजनिक दायित्व को केवल भूमिका की तरह निभाता है और कौन उसे साधना की तरह जीता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी