अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, किसान हित सर्वोच्चः शिवराज

 


नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। दक्षिण-पश्चिम मानसून, संभावित अल नीनो प्रभाव, जल उपलब्धता, बीज व्यवस्था, फसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की मंगलवार को कृषि भवन में विस्तृत समीक्षा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी संबंधित केंद्रीय विभागों, राज्य सरकारों को समन्वय और अग्रिम योजना के साथ काम करने के निर्देश दिए।

चौहान ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मोदी सरकार पूरी सतर्कता के साथ तैयारी कर रही है और लक्ष्य यह है कि मौसम की चुनौती का असर खेत और किसान पर न्यूनतम रहे। उन्होंने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं। बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियों और संभावित प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

चौहान ने स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है, लेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास, बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु-सहनशील कृषि उपायों के कारण संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उपलब्ध आकलन के अनुसार जलाशयों का भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत पर है, जिससे खरीफ मौसम में सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी और नमी की कमी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि अब चुनौती केवल वर्षा पूर्वानुमान की नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जमीनी तैयारी की है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षा, लंबा ड्राई स्पेल या अल नीनो का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, वहां विशेष निगरानी, सतत समीक्षा और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाएं सक्रिय की जाएं और कंटिन्जेंसी प्लान को केवल कागजी कार्यवाही न माना जाए।

जलाशयों के पानी के उपयोग के विषय पर शिवराज ने कहा कि जहां पानी उपलब्ध है, वहां उसका वैज्ञानिक, संतुलित और प्राथमिकता-आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर प्रणाली के अंतिम छोर तक पानी पहुंच रहा है या नहीं, कमांड एरिया में जल का उपयोग किस प्रकार हो रहा है और सीमित जल से अधिकतम फसल एवं अधिकतम किसानों को किस तरह सुरक्षा दी जा सकती है, इस पर राज्यों को स्पष्ट सलाह दी जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि दो, तीन या चार सप्ताह का वर्षा-अंतराल बनता है, तो उसके लिए भी पहले से स्पष्ट रणनीति होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पुनर्बुवाई, जीवनरक्षक सिंचाई, कम अवधि वाली फसलें, वैकल्पिक बुवाई योजना और जिला-विशिष्ट सलाह किसानों तक समय पर पहुंचनी चाहिए।

बैठक में रोग और कीट प्रबंधन को भी विशेष महत्व दिया गया।

शिवराज ने कहा कि अब सरकार के पास पर्याप्त डेटा, तकनीकी प्लेटफॉर्म और संचार व्यवस्था उपलब्ध है, इसलिए किसानों तक सीधे मोबाइल संदेश, सलाह, चेतावनी और फसल संबंधी जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी