11 हजार किमी के 7 हाईडेंसिटी रेलमार्ग होंगे फोरलेन: रेल मंत्री
नई दिल्ली, 26 अगस्त (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने देश के सात हाई डेंसिटी रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम तेज किया है। करीब 11 हजार किलोमीटर में फैले ये सात मार्ग भारतीय रेल के कुल यातायात का लगभग 41 प्रतिशत संभालते हैं, जबकि ये पूरे रेल नेटवर्क के करीब 16 प्रतिशत हिस्से में आते हैं। इन अत्यधिक व्यस्त मार्गों पर अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित कर इन्हें चारलेन करने की योजना है, जिससे बढ़ते यात्री और माल यातायात को सुगमता से संचालित किया जा सके।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर देश के सात हाई-डेंसिटी रेलवे रूट को फोर-लेन करने की योजना का खाका सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे पूरे हाई डेंसिटी नेटवर्क को चार लाइन वाला बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता बढ़ाने के साथ अधिक ट्रेनों का संचालन करना, भीड़भाड़ कम करना और यात्री एवं माल परिवहन को तेज करना है।
वैष्णव के अनुसार, इन सात हाई डेंसिटी मार्गों में दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-चेन्नई, चेन्नई-मुंबई, मुंबई-दिल्ली, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-हावड़ा और दिल्ली-गुवाहाटी शामिल हैं। इन मार्गों में दिल्ली, मुंबई, वडोदरा, नागपुर, हावड़ा, चेन्नई और गुवाहाटी जैसे प्रमुख रेल केंद्र जुड़े हैं। इन रूटों पर कुछ हिस्सों में चार लाइन की व्यवस्था पहले से मौजूद है, जबकि कुछ हिस्सों के विस्तार को मंजूरी मिल चुकी है और कुछ परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने या उनका मूल्यांकन करने का काम चल रहा है।
रेल मंत्री ने रेल परिवहन के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन की तुलना में रेल करीब 90 प्रतिशत अधिक पर्यावरण अनुकूल है। माल ढुलाई की औसत लागत भी रेल में सड़क के मुकाबले काफी कम है। रेल से माल ढुलाई की लागत करीब 1.6 रुपये प्रति टन प्रति किलोमीटर आती है, जबकि सड़क परिवहन में यह करीब 3.6 रुपये प्रति टन प्रति किलोमीटर है।
वैष्णव ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना और परिवहन व्यवस्था को अधिक हरित बनाना जरूरी है। ऐसे में महत्वपूर्ण हाईडेंसिटी कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। इन मार्गों का विस्तार देश के प्रमुख औद्योगिक, वाणिज्यिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने के साथ भविष्य में बढ़ने वाले यात्री और माल यातायात की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार