पूर्वोत्तर भारत का ग्रोथ इंजन, ग्लोबल साउथ का प्रवेश द्वार : सिंधिया

 


नई दिल्ली, 28 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर सांस्कृतिक महोत्सव में कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत का ग्रोथ इंजन है और यह ग्लोबल साउथ के लिए देश का प्रवेश द्वार बन सकता है। आठ राज्यों में असाधारण क्षमता है और करीब 93 प्रतिशत साक्षरता के साथ यह क्षेत्र देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में आयोजित पूर्वोत्तर सांस्कृतिक महोत्सव (एनईटिम) 2026 के 15वें संस्करण को संबोधित करते हुए पूर्वोत्तर की प्रतिभा, ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाने वाला सशक्त मंच बताया।

उन्होंने पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को और गहराई से समझने का अवसर दिया है। यह क्षेत्र न केवल भारत के लिए बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया और वैश्विक परिदृश्य के लिए भी एक रणनीतिक सेतु है।

सिंधिया ने पूर्वोत्तर के मानव संसाधन की सराहना करते हुए कहा कि यहां की साक्षरता दर लगभग 93 प्रतिशत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश की विकास यात्रा का नेतृत्व करें। उन्होंने पूर्वोत्तर से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी उल्लेख किया और कहा कि आठों राज्यों की यात्राओं ने उनके दृष्टिकोण को नई ऊर्जा दी है।

उन्होंने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए भूपेन हजारिका और जुबिन गर्ग जैसे कलाकारों को याद किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की कला और संस्कृति अद्वितीय है और हर प्रस्तुति में परंपरा की गहराई दिखाई देती है।

मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्य भारत और ग्लोबल साउथ के बीच प्राकृतिक सेतु हैं, जो आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं को सशक्त बनाने के लिए मंत्रालय की प्रमुख पहलों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि एडवांसिंग एनईआर पोर्टल अप्रैल 2026 में शुरू किया जाएगा। यह एकीकृत डिजिटल मंच होगा, जो 1000 से अधिक रोजगार अवसर, 300 से अधिक करियर विकल्प, 200 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं और 3000 से अधिक पाठ्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराएगा।

सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के विकास का दृष्टिकोण इरादों से आगे बढ़कर क्रियान्वयन तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अब अवसरों को पहुंच और समावेशन के आधार पर परिभाषित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में छात्रों, कलाकारों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विविधता और संभावनाओं का प्रदर्शन किया।

उल्लेखनीय है कि एनई स्पार्क्स कार्यक्रम के तहत इसरो के सहयोग से हर वर्ष 800 छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के माध्यम से पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों के छात्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें अब तक 1280 छात्र शामिल हो चुके हैं और 2030 तक इसे 8000 छात्रों तक ले जाने का लक्ष्य है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर