शिक्षा में भारतीय जीवन-मूल्यों के साथ वैश्विक दृष्टिकोण जरूरी : दत्तात्रेय होसबाले
-प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का संबोधन
गुवाहाटी, 08 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास और उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का साधन होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा में भारतीयता, भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना के समावेश के साथ विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया।
होसबाले प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में आयोजित ‘विश्वविद्यालय परिवार को विशेष संबोधन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने व्यक्ति और समाज के विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सरकार्यवाह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रमुख आयामों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, कौशल आधारित शिक्षा, चरित्र निर्माण और मूल्य शिक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना या डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों में जीवन के प्रति व्यापक समझ, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित होनी चाहिए।
संघ के सरकार्यवाह ने विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस बैच का विश्वविद्यालय के इतिहास में विशेष और स्थायी स्थान रहेगा। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय को सामूहिक एवं गैर-लाभकारी प्रयासों से स्थापित संस्थान बताया।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है।
कुलपति ने कहा कि आधुनिक एवं वैश्विक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ना भी आवश्यक है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को मूल्यनिष्ठ और सशक्त बनाना तथा उन्हें ऐसे समाज के निर्माण में योगदान के लिए तैयार करना है, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा होने के साथ आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वी. भागैया और दत्तात्रेय होसबाले ने पौधारोपण किया।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. देवव्रत खनिकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, विश्वविद्यालय नेतृत्व, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समस्त विश्वविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश