खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र ने बदली कवरत्ती द्वीप की तकदीर
नई दिल्ली, 07 मार्च (हि.स.)। कभी खारे कुएं का पानी पीने को मजबूर रहे लक्षद्वीप के लोगों के लिए अब हालात बदल चुके हैं। कवरत्ती द्वीप में स्थापित संयंत्रों की बदौलत अब लोगों के घरों तक साफ पेयजल पहुंच रहा है। लो टेंपरेचर थर्मल डिसेलिनेशन (एलटीटीडी) तकनीक का प्रयोग करके वहां खारे पानी को मीठा पानी बनाने की दिशा में तेजी से काम हुआ है। मीठा पानी की उपलब्धता बढ़ने से वहां के लोगों ने संतोष जाहिर किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को कवरत्ती में एलटीटीडी प्लांट का दौरा कर शनिवार से स्थानीय लोगों से बात की।
स्थानीय निवासी अब्दुल रहमान ने मंत्री से बातचीत में कहा कि पहले लोग घरों के पास बने छोटे कुओं का पानी पीते थे, जो अक्सर खारा होता था। अब हमारे इलाके में सभी लोग पीने के लिए डी-सैलिनेटेड पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे मन की चिंता दूर हुई है। एक अन्य निवासी वालिया बी ने बताया कि पहले रोज कुएं से पानी लाकर घर तक पहुंचाना पड़ता था। अब नल के जरिए घर के पास ही साफ पानी मिलने लगा है। वालिया ने कहा कि जीवन में पहली बार ताजे पानी से बनी चाय पीने का अनुभव भी इसी परियोजना के बाद मिला।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि भविष्य में यहां ओशियन थर्मल एनर्जी कनवर्जन (ओटीईसी) परियोजना पर भी काम चल रहा है। इससे स्वच्छ बिजली उत्पादन के साथ-साथ ताजा पानी भी तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि लक्षद्वीप में लंबे समय से पेयजल की समस्या रही है क्योंकि भूमिगत मीठे पानी के स्रोत बहुत सीमित हैं। समुद्र के कारण पानी में खारापन आ जाता है । बारिश पर काफी निर्भरता रहती है। अब डी-सैलिनेशन परियोजनाएं द्वीपों के लिए स्थायी और भरोसेमंद पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
उल्लेखनीय है कि लो टेंपरेचर थर्मल डिसेलिनेशन (एलटीटीडी) एक ऐसी तकनीक है जो समुद्र की सतह के गर्म पानी और गहरी परत के ठंडे पानी (लगभग 8°सेलसियस के तापमान अंतर) का उपयोग करके खारे पानी को कम तापमान (कम ऊर्जा) पर वाष्पीकृत और संघनित करके पीने योग्य पानी में बदलती है। भारत में एनआईओटी ने इसे लक्षद्वीप में सफलतापूर्वक लागू किया है, जो द्वीपों के लिए एक टिकाऊ समाधान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी