खिलाड़ियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए सफदरजंग अस्पताल व एसएआई के बीच समझौता

 


नई दिल्ली, 10 जुलाई (हि.स.)। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मकसद से सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) ने शुक्रवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान खेल चोटों की रोकथाम, उपचार, पुनर्वास, खेल विज्ञान, अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।

समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव की उपस्थिति में हुए।

इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों और एसएआई से जुड़े सहयोगी स्टाफ के लिए एक समन्वित और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा तंत्र विकसित करना है।

समझौते के तहत स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और एसएआई के व्यापक खिलाड़ी नेटवर्क को एक साथ जोड़कर खिलाड़ियों को खेल चोटों की रोकथाम, समय पर जांच, आधुनिक उपचार, पुनर्वास और खेल विज्ञान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा दोनों संस्थान खेल चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप उपचार प्रोटोकॉल विकसित करने, चोटों की रोकथाम की नई रणनीतियां तैयार करने और साक्ष्य आधारित खेल चिकित्सा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि यह समझौता स्वास्थ्य और खेल क्षेत्र के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने देशभर में खेल चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, स्पोर्ट्स मेडिसिन में स्नातकोत्तर शिक्षा को मजबूत करने तथा नए एम्स संस्थानों में भी खेल चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि खेल चिकित्सा और खेल विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय खिलाड़ियों की शारीरिक संरचना और आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई उपचार प्रोटोकॉल और वैज्ञानिक मानक पश्चिमी देशों के आंकड़ों पर आधारित हैं, जो भारतीय खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हो सकते। इसलिए भारत-केंद्रित वैज्ञानिक शोध और उपचार प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय खेल प्राधिकरण के उत्कृष्टता केंद्रों को निकटवर्ती मेडिकल कॉलेजों से जोड़ा जाए, ताकि खिलाड़ियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता, अनुसंधान और प्रशिक्षण का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, सफदरजंग अस्पताल, स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी