‘गागर में सागर’ है संघ अनुभव शाला, संघ को जानने-समझने का अनोखा प्रयोग : डॉ. मोहन भागवत

 




सरसंघचालक ने किया संघ अनुभव शाला का लोकार्पण

सौ वर्ष की यात्रा, विचार और समाज कार्य का तकनीक व कला के माध्यम से प्रत्यक्ष दर्शन

इंदौर, 18 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की तपस यात्रा, विचार, कार्यपद्धति और समाज जीवन में उसके योगदान को एक ही स्थान पर अनुभव करने का अवसर अब संघ अनुभव शाला के रूप में उपलब्ध होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार शाम डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के सुदर्शन भवन में निर्मित ‘संघ अनुभव शाला’ का लोकार्पण किया। प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद उन्होंने इसे ‘गागर में सागर भरने वाली प्रदर्शनी’ बताते हुए कहा कि संघ को कोई प्रदर्शन नहीं करना है, बल्कि संघ को जानने-समझने के लिए यह अनुभवशाला एक अच्छा प्रयोग है। उनके अनुसार, पूरी दुनिया और निकट के इतिहास में संघ जैसा संगठन या कार्य देखने को नहीं मिलता।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ लोकार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात डॉ. भागवत ने अनुभवशाला में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर अनुभवशाला के निर्माण में योगदान देने वाले निर्माताओं का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

संघ को जानने के लिए अनुभव जरूरी

अपने उद्बोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि ‘अनुभवशाला’ नाम अपने आप में सार्थक है। संघ एक अनोखा संगठन है और इसके जैसा कोई दूसरा संगठन नहीं है। इसलिए संघ को जानने और समझने के लिए अनुभवशाला एक अच्छा प्रयोग है। उन्होंने कहा कि संघ परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को बदलने का सामर्थ्य रखता है, लेकिन उसकी कुछ बातें ऐसी हैं जो अपरिवर्तनीय हैं। इन दोनों पहलुओं को समझने के लिए भी अनुभव की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि संघ का वास्तविक अनुभव संघ के किसी कार्यक्रम में तीन-चार दिन साथ रहकर प्राप्त किया जा सकता है। संघ को जानने-समझने के लिए लोग उसके कार्यालयों में भी आते हैं और वहां के वातावरण तथा कार्यप्रणाली को देखते हैं। इसी प्रत्यक्ष अनुभव को एक सीमित स्थान में प्रस्तुत करने का प्रयास संघ अनुभव शाला में किया गया है। इसके साथ ही डॉ. भागवत ने कहा कि “गागर में सागर भरने वाली प्रदर्शनी यह अनुभवशाला है।” यह संघ का प्रत्यक्षदर्शन कराने वाली व्यवस्था है, जिसके माध्यम से आगंतुक संघ की यात्रा और उसके कार्य को एक अलग दृष्टि से समझ सकते हैं।

एक विचार, एक यात्रा- राष्ट्र प्रथम’ की भावभूमि

संघ अनुभव शाला की जानकारी देते हुए मोहित जैन ने बताया कि ‘एक विचार, एक यात्रा राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर आधारित यह अनुभवशाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा को सरल, रोचक और आधुनिक माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करती है। यहां आने वाले आगंतुकों के सामने तीन मूल प्रश्न रखे गए हैं, संघ क्या है? इसकी स्थापना क्यों हुई? और संघ कैसे कार्य करता है? प्रदर्शनी में विभिन्न माध्यमों के जरिए इन प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं।

प्रदर्शनी की शुरुआत भारत की प्राचीन सभ्यता और ज्ञान-परंपरा से होती है और इसके बाद संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि से लेकर उसकी शताब्दी यात्रा और समाज कार्य के विस्तार तक की झलक दिखाई जाती है। वीडियो गैलरी, चित्र, आलेख और आधुनिक तकनीक के माध्यम से संघ के क्रमिक विस्तार तथा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए समाज कार्य को प्रस्तुत किया गया है।

पंच परिवर्तन से दैनिक जीवन तक जुड़ाव

अनुभवशाला में संघ द्वारा बताए गए ‘पंच परिवर्तन’ के पांच आयामों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य को दैनिक जीवन से जोड़कर समझाने का प्रयास किया गया है। अनुभवशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की संस्कृति और ज्ञान-परंपरा से परिचित कराने के साथ सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्य की भावना को व्यवहार से जोड़ना है। ‘राष्ट्र प्रथम’ के विचार को केवल विचार के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाने योग्य व्यवहार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

उच्च तकनीक और कला का समन्वय

संघ अनुभव शाला का निर्माण उच्च तकनीक और उत्कृष्ट कला के समन्वय से किया गया है। वीडियो गैलरी, चित्रों और आलेखों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, उसके क्रमिक विस्तार तथा समाज कार्य के दृढ़ीकरण को प्रत्यक्ष रूप में अनुभव करने की व्यवस्था की गई है। इस कारण यह केवल पारंपरिक प्रदर्शनी न रहकर आगंतुक को संघ की यात्रा से जोड़ने का प्रयास करती है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के उमेश वर्मा ने किया। समिति के सचिव राकेश यादव ने आभार व्यक्त किया। लोकार्पण के बाद उपस्थित समाजजनों और स्वयंसेवकों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

27 सितंबर से आमजन के लिए खुलेगी

संघ अनुभव शाला 27 सितंबर से प्रतिदिन प्रातः नौ बजे से रात्रि आठ बजे तक आमजन के निःशुल्क अवलोकन के लिए उपलब्ध रहेगी। प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए संघ साहित्य के साथ भारतीय संस्कृति का अनुभव कराने वाली अन्य सामग्री भी उपलब्ध रहेगी। समाजजनों की सुविधा के लिए अनुभवशाला से संबंधित वेबसाइट और सोशल मीडिया लिंक भी उपलब्ध कराए जाएंगे। लोकार्पण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, इंदौर विभाग संघचालक मुकेशजी मोढ, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के अध्यक्ष ईश्वरजी हिंदुजा सहित संघ के अन्य अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी