वंचित वर्ग की उन्नति के लिए आरक्षण महत्वपूर्ण, व्यवस्था बनी रहनी चाहिएः होसबाले

 






-इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक संपन्न

-देशभर में 94 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन, युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर

इंदौर, 04 नवंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज कहा कि वह आरक्षण की व्यवस्था को वंचित एवं पिछड़े वर्ग की उन्नति और सामाजिक समरसता के लिए महत्वपूर्ण मानता है और यह व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के डेली कॉलेज में दो नवंबर से चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक बुधवार को संपन्न हुई जिसके बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संघ समाज के सभी वर्गों के विषय में विचार करता है और सामाजिक समरसता के साथ वंचित एवं पिछड़े वर्गों की उन्नति को भी महत्वपूर्ण मानता है। समाज के जो वर्ग पिछड़े हुए हैं, उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “आरक्षण के संबंध में पहले ही हमने कहा है, जिन लोगों के साथ समाज में किसी न किसी कारण से भेदभाव हुआ और वे इस कारण से सामाजिक, शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ गए हैं, उनके लिए आरक्षण की व्‍यवस्‍था है, जब तक उनको नहीं लगता कि उनके बीच समानता नहीं आ गई है, तब तक भारत में आरक्षण की व्‍यवस्‍था लागू रहनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “आरक्षण का फ़ायदा उन सभी लोगों तक पहुँचना चाहिए जो सच में इसके हक़दार हैं। अगर कुछ खास वर्गों को फ़ायदा मिल रहा है और दूसरे छूट रहे हैं तो ज़रूरी सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए। हालाँकि, ऐसे सुधार उन समुदायों और लोगों से सलाह करके किए जाने चाहिए जिन्हें आरक्षण का फ़ायदा मिल रहा है।“

सरकार्यवाह ने संघ के विस्तार, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, सामाजिक समरसता, आपदा राहत और संघ की भावी कार्यदिशा से जुड़े विषयों पर चर्चा और निष्कर्षों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए। होसबाले ने बताया कि संघ ने शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में संगठन विस्तार का अभियान चलाया। इसके परिणामस्वरूप एक वर्ष में 10,241 नए स्थानों तक संघ की पहुंच बनी। वर्तमान में देश के 63,208 स्थानों पर 99,423 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही 34,982 साप्ताहिक मिलन और 14,096 मासिक मंडलियां भी चल रही हैं। शाखाओं और मिलन की इन गतिविधियों के माध्यम से संघ की पहुंच कुल 1,03,397 स्थानों तक हो गई है। इस तरह से कुल एक वर्ष में 2025 से अब तक कुल स्थान वृद्धि 10,241 रही है।

सामाजिक एकता और समरसता के प्रयासों का उल्लेख करते हुए सरकार्यवाह ने बताया कि शताब्दी वर्ष में देशभर में 94,218 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। संघ के अनुसार, इन सम्मेलनों में करीब पांच करोड़ लोगों ने भागीदारी की। इन आयोजनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद, सामाजिक एकता और परस्पर संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया गया। बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ यह भी विचार किया गया कि इन गतिविधियों को आगे किस प्रकार समाज के दैनिक व्यवहार और संगठनात्मक कार्यों से जोड़ा जाए।

आपदा राहत के कामों का विवरण देते हुए होसबाले ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, अतिवृष्टि और चक्रवात से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए स्वयंसेवकों ने स्थानीय संस्थाओं और समाज के सहयोग से अभियान चलाए। असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में इस वर्ष पहली बार बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी। नागालैंड की पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण आई बाढ़ से 805 गांवों के 67,700 परिवार प्रभावित हुए। इस आपदा में 1,500 से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। राहत कार्य में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया और करीब 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी तथा दवाइयां पहुंचाईं। लगभग 150 परिवारों को मकानों के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। संघ के अनुसार, इस सेवा कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से शहर के करीब 2,000 परिवारों और 28 गांवों के ग्रामीण परिवारों को नुकसान पहुंचा। यहां 350 कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर राहत किट वितरित की। छह हजार से अधिक लोगों के भोजन की स्थायी व्यवस्था की गई, जबकि 5,600 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के टीकाकरण का प्रयास भी किया गया। इसी तरह लखनऊ क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति बनी, जिससे 40 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए। इनमें से करीब 25 हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। तीन सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई।

उन्होंने कहा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात से मकानों, फसलों, पशुधन, नारियल के पेड़ों और बिजली के खंभों को व्यापक नुकसान पहुंचा। कंधमाल, गंजाम, श्रीकाकुलम और विजयवाड़ा सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्वयंसेवक स्थानीय समाज के साथ मिलकर राहत एवं सहायता कार्यों में जुटे हैं। कई स्थानों पर नारियल के हजारों पेड़ उखड़ गए और चार-पांच दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। मछुआरों और किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ा। स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतों के साथ उनकी आजीविका से जुड़ी समस्याओं में मदद का प्रयास किया।

पश्चिम बंगाल में संघ की शाखाओं के विस्तार से जुड़े प्रश्न पर होसबाले का कहना रहा कि वहां पहले की तुलना में शाखाओं की संख्या डेढ़ सौ गुना बढ़ी है। पहले शाखाएं लगाने के दौरान विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, जबकि अब परिस्थितियों में बदलाव आया है और शाखा संचालन में पहले जैसी परेशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ ऐसे क्षेत्रों में भी शाखाएं शुरू कर रहा है, जहां जनसंख्या और हिंदुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। संगठन का प्रयास देश के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच बनाने का है।

युवाओं और नई पीढ़ी से जुड़े सवालों पर सरकार्यवाह ने कहा कि समाज के सभी वर्ग संघ के विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। इनमें महिलाएं और युवा भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस पीढ़ी को सकारात्मक कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। बैठक में जेन-जी के बदलते रुझान, शिक्षा के क्षेत्र में संघ की भूमिका और विदेशों में संघ के कार्यों के विस्तार जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संपर्क मजबूत करने की दिशा पर भी प्रतिनिधियों ने विचार किया।

संघ के पंजीयन को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में होसबाले का कहना था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज का अंग है। ऐसे अनेक संगठन हैं, जिनका पंजीयन नहीं है। संघ समाज के कल्याण और देश के कानून के अनुरूप काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और सभी को अपने विचार रखने तथा गतिविधियां संचालित करने का अधिकार है, पर समाज में अराजकता फैलाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।

इस बैठक में राष्ट्रीय चेतना के पितामह श्री राजनारायण बोस की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन एवं योगदान के संबंध में, शुद्धिकरण आंदोलन के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100वें वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, कार्य एवं योगदान पर और ओडिशा के कंधमाल जनजातीय क्षेत्र में स्वाभिमान, स्वावलंबन एवं स्वधर्म की जागृति के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म के 100वें वर्ष के अवसर पर भी संघ संरकार्यवाह होसबाले ने अपना वक्तव्य रखा।

तीन दिवसीय बैठक में संघ की सौ वर्ष की यात्रा के बाद संगठन की भावी दिशा पर व्यापक मंथन हुआ। शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार, युवाओं की भागीदारी, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। बैठक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि शताब्दी वर्ष में समाज के बीच बने संपर्क और आयोजित कार्यक्रमों को आगे निरंतर सामाजिक गतिविधियों में कैसे बदला जाए। होसबाले के वक्तव्य से स्पष्ट हुआ कि संघ आने वाले समय में संगठन के विस्तार के साथ सामाजिक प्रश्नों, आपदा राहत और युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी