भारत की आध्यात्मिक शक्ति से विश्व सुरक्षितः मोहन भागवत
नागपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि जब तक भारत का अस्तित्व बना रहेगा, तब तक पूरी दुनिया सुरक्षित रहेगी।
डॉ. भागवत ने यहां सोमवार को पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव के दौरान संतों की एक सभा को संबोधित करते हुए देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक श्रेष्ठता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की आत्मा है और उसकी उपस्थिति वैश्विक संतुलन के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के बढ़ते प्रभाव ने कई समाजों को कमजोर कर दिया है, लेकिन भारत इन चुनौतियों के बीच भी अडिग बना हुआ है। भारत के पास ऐसी आध्यात्मिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता है, जो अन्य देशों में दुर्लभ है।
इतिहास का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि ग्रीस, मिस्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ समाप्त हो गईं, लेकिन भारत की सभ्यता आज भी जीवित और सशक्त है। उन्होंने इस निरंतरता का श्रेय देश के संतों, महापुरुषों और पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान को दिया। उन्होंने कहा कि हमारे अस्तित्व का रहस्य वह ज्ञान है जो हमें अपने संतों से मिला है। जब भी विश्व किसी संकट का सामना करता है, भारत ही आगे का मार्ग दिखाता है। संघ प्रमुख ने संतों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रसारित आध्यात्मिक ज्ञान ही भारत की असली ताकत है, जो देश को बाहरी प्रभावों से सुरक्षित रखती है।उल्लेखनीय है कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव जैन धर्म का एक भव्य पांच दिवसीय अनुष्ठान है, जिसमें नए जिनालयों में तीर्थंकर प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस दौरान भगवान के जीवन के पांच कल्याणक- गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष मनाए जाते हैं। -----------------
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी