सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और कर्तव्य बोध से विश्वगुरु बनेगा भारत : आलोक कुमार
चंडीगढ़, 18 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, कुटुम्ब प्रबोधन तथा कर्तव्य बोध को अपनाकर ही देश पुनः विश्वगुरु के पथ पर आगे बढ़ सकेगा। संघ के शताब्दी वर्ष में अपना गुणगान या महिमामंडन नहीं, बल्कि पंच परिवर्तन के संकल्प पर देश को एकजुट कर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
आलोक कुमार रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पानीपत के एसडी कॉलेज में “राष्ट्र निर्माण में खेल-खिलाड़ी की भूमिका” विषय पर एक विचार संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर ओलम्पिक पदक विजेता रवि दहिया ने शिरकत की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा के प्रांत संघचालक प्रताप, प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल, खेल विश्वविद्यालय राई के कुलपति एवं उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी डॉ. अशोक,अंतर्राष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त, भारत की पहली महिला पैरा ओलम्पिक पदक विजेता दीपा मलिक, सुनील डबास सहित पदमश्री,द्रोणाचार्य अवार्डी,अर्जुन अवार्डी,भीम अवार्डी सहित भारी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मौजूद रहे।
आलोक कुमार ने कहा कि आज हमारा देश 140 करोड़ की जनसंख्या का देश है और यह जनसंख्या हमारी ताकत बने इसके लिए हम सबको एक साथ मिलकर सकारात्मक दिशा में काम करना होगा। इतनी बड़ी जनसंख्या के रहने व अन्य मूलभूत जरुरतों के पूरा करने के लिए पर्यावरण संतुलन बिगड़ गया है। इसका मुख्य कारण हमारे अंदर बढ़ रही उपभोक्तावाद की भावना है। इससे हमारी हवा, जल, खानपान सब दूषित हो गया है। इस बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को रोकने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना होगा। इसमें हर नागरिक को अपना सहयोग करना होगा।
आलोक कुमार ने कहा कि जाति-पाति, छुआछूत देश की बहुत बड़ी समस्या है और संघ इस समस्या को खत्म करने के लिए प्रयासरत है। देश को अगर तरक्की के रास्ते पर लेकर जाना है तो हमें जाति भेद को खत्म करना होगा और यह तभी संभव है जब हम सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक तौर पर समृद्ध करने के लिए हमें स्वदेशी को अपनाना होगा। अक्सर घर में नई चीज आने के बाद हमें पुरानी चीजें बेकार लगने लगती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि पुरानी चीजें खराब हैं। 15वीं शताब्दी में जब अंग्रेज शिक्षण संस्थान खड़े कर रहे थे तो उस समय हमारे पास नालनंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे। हमारी शिक्षा व्यवस्था उनसे कहीं ज्यादा बेहतर थी। हरियाणा तो इस बात का गवाह है।
उन्होंने कहा कि विदेशों की बजाए हमारे यहां कानून काफी लचीला है इसलिए हमारे यहां कर्त्तव्यबोध पर अधिकारबोध हावी है। हम अधिकारों को लेकर तो जागरुक हैं लेकिन कर्त्तव्य की बात आने पर हम पीछे हट जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे अंदर मानवता नहीं है। हमारी मानवता का जीता जागता उदाहरण कोरोना काल है।
आलोक कुमार ने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब देते हुए खिलाड़ियों से आह्वान किया कि खिलाड़ी भी युवाओं को नशे से दूर रहने व खेलों के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करें। ख्याति प्राप्त खिलाड़ी रोल मॉडल बनकर युवाओं को सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरुक करें और अधिक से अधिक युवाओं को सामाजिक कार्यों के साथ जोड़ें।
खिलाड़ी होते हैं देश की धरोहर
ओलंपिक पदक विजेता रवि दहिया ने कहा कि आज समय बहुत बदल गया है इसलिए खिलाड़ियों को बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है। क्योंकि खिलाड़ी देश की धरोहर होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि जो खिलाड़ी सच्ची नीयत के साथ मेहनत करता है तो वह जीवन में सफल अवश्य होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा