रियाद पर हूती हमले के बाद विपक्ष की चुप्पी पर विहिप का सवाल, विनोद बंसल ने घेरा

 


प्रियंका गांधी और ओवैसी से पूछा- गाजा की तरह रियाद के निर्दोषों के लिए भी उठेगी आवाज?

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (हि.स.)। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों के हमले में 12 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद भारत में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कांग्रेस एवं उन तमाम नेताओं से कई सवाल किए हैं, जोकि पिछले दिनों फिलिस्तीन को लेकर केंद्र की मादी सरकार को घेर रहे थे और भारत की विदेश नीति पर उंगली उठा रहे थे।

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाने वाले राजनीतिक दलों से सवाल किया है कि क्या वे रियाद में निर्दोष नागरिकों पर हुए हमले की भी उतनी ही मुखरता से निंदा करेंगे, जितनी गाजा के मुद्दे पर दिखाई गई थी। बंसल ने इस प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए आतंकवाद के विरोध में समान मापदंड अपनाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को हुए हमले में सऊदी अधिकारियों के अनुसार 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए। मृतकों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं। हमले के बाद हवाई अड्डे पर परिचालन रोक दिया गया। घटना ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और आम नागरिकों की जान पर मंडराते खतरे को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।

बंसल के पांच सवाल, राजनीतिक जवाबदेही पर जोर

विनोद बंसल ने प्रियंका गांधी और ओवैसी का उल्लेख करते हुए पूछा है कि क्या वे रियाद हवाई अड्डे पर हमले की स्पष्ट निंदा करेंगे, क्या निर्दोष नागरिकों की हत्या के विरुद्ध उनकी आवाज समान रूप से बुलंद होगी और क्या वे हूती विद्रोहियों की हिंसक कार्रवाइयों का खुलकर विरोध करेंगे। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि फिलिस्तीन के समर्थन में मुखर रहने वाले नेता सऊदी अरब के नागरिकों के साथ एकजुटता क्यों नहीं दिखाते।

बंसल का तर्क है कि मानवाधिकार और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा किसी एक देश, धर्म या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित विषय नहीं हैं। आतंकवाद के विरोध में भी समान कसौटी अपनाई जानी चाहिए। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं में अंतर सार्वजनिक जवाबदेही का विषय है।

गाजा पर मुखरता और रियाद पर प्रतिक्रिया की तुलना

इस विवाद का केंद्र अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर भारतीय राजनीति की पूर्व दी गई प्रतिक्रिया है। गाजा के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्ष के कई नेताओं ने इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है और फिलिस्तीनियों के अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई है। प्रियंका गांधी वाड्रा भी फिलिस्तीन के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुकी हैं। ओवैसी ने संसद में शपथ के दौरान ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा लगाया था, जिस पर उस समय राजनीतिक विवाद हुआ था।

अब विहिप ने इसी पृष्ठभूमि में रियाद हमले पर नेताओं की प्रतिक्रिया को सवालों के घेरे में रखा है। संगठन का कहना है कि नागरिकों पर हमले की निंदा का आधार पीड़ितों की पहचान या संघर्ष में शामिल पक्षों की धार्मिक पृष्ठभूमि नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यहां हमला करनेवाले भी इस्लामिक हैं और जिन पर यह हुआ है, वह भी इस्लाम को माननेवाले हैं, इसलिए भारत में कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करेगी, अब ये नहीं चलेगा।

भारतीय हितों से भी जुड़ा है खाड़ी क्षेत्र का संकट

इसके साथ ही विहिप का कहना यह भी है कि सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रोजगार करते हैं। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, हवाई यातायात, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ सकता है। ऐसे में रियाद हमले की निंदा और नागरिकों की सुरक्षा का सवाल घरेलू राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर भारत के राष्ट्रीय हितों से भी जुड़ता है।

उन्होंने कहा, आतंकवादी हिंसा के विरुद्ध स्पष्ट रुख और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर राजनीतिक सहमति इस परिस्थिति में विशेष महत्व रखती है। वहीं, इस संबंध में विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने विपक्षी नेताओं से इसी कसौटी पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी