जुनून के दम पर रांची के इशांक की उपलब्धि से पूरा झारखंड गाैरवांवित

 




रांची, 01 मई (हि.स.)। स्थानीय धुर्वा डैम में तैराकी सीखने वाले रांची के सात वर्षीय नन्हे तैराक इशांक सिंह ने अपनी अद्भुत इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के दम पर इतिहास रच दिया है, जिससे पूरा झारखंड गौरवान्वित है। इशांक ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के आगे कोई चुनौती बड़ी नहीं होती। इशांक पाक जलडमरूमध्य को तैरकर पार करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बन गए।

इशांक की तैयारी को मजबूत बनाने में उनके कोच अमन कुमार जायसवाल की अहम भूमिका है। कोच ने बताया कि वह बच्चे की लगन देखकर व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। हर स्तर पर मार्गदर्शन कर रहे हैं। तकनीकी अभ्यास, सहनशक्ति, स्पीड और ओपन वाटर स्विमिंग की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वह बड़े मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

इशांक की सफलता से गदगद उसकी मां मनीषा ने कहा कि इशांक के लिए तैराकी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी पसंद है। वह हर दिन पूरे उत्साह के साथ अभ्यास करता है। पिता सुनील का कहना है कि बेटे का यह प्रयास पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात हो सकती है। परिवार को विश्वास है कि इशांक आने वाले समय में राज्य और देश का नाम रोशन करेगा।

नन्हा तैराक इशांक अब विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच चुका हैं। दुनिया में सबसे कम उम्र में सबसे तेज तैराक हाेने की उपलब्धि उसने अपने जुनून की दम पर हासिल की है। काेच के अनुसार इशांक प्रतिदिन रांची के धुर्वा डैम में चार से पांच घंटे में 15 से 20 किलोमीटर तक कठिन अभ्यास करता है। उसकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सप्ताह में एक दिन वह लगातार आठ घंटे तक पानी में रहकर अपनी सहनशक्ति और मानसिक मजबूती को और बेहतर बनाता है।

ढाई साल की उम्र से तैराकी सीखने वाले इशांक के लिए पानी अब केवल खेल नहीं, बल्कि जुनून है। कम उम्र के बावजूद इशांक का ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद मजबूत है। वह कई जिला और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुका है। हाल ही में 22 फरवरी को मुंबई में आयोजित गेटवे ऑफ इंडिया इवेंट में उन्होंने अरेबियन समुद्र में एक किलोमीटर तैराकी प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है। डीएवी श्यामली में तीसरी कक्षा के छात्र इशांक का शैक्षणिक प्रदर्शन भी अच्छा है। इशांक की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लहर रास्ता नहीं रोक सकती।

उल्लेखनीय है कि इशांक ने गुरुवार काे झारखंड के 7 साल इशांक ने समुद्र की लहरों पर तैरकर दुनिया के सबसे कम उम्र और सबसे तेज तैराक होने का दोहरा रिकॉर्ड बनाया है। इशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से तैरना शुरू कर भारत के धनुषकोडी तक की दूरी केवल 9 घंटे 50 मिनट में पूरी की है।

रांची, 01 मई (हि.स.)। स्थानीय धुर्वा डैम में तैराकी सीखने वाले सात वर्षीय इशांक की मेहनत और जुनून के दम पर सबसेे कम उम्र और सबसे तेज

तैराक हाेने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि पर पूरा झारखंड गाैरवांवित महसूस कर रहा है। इशांक ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के आगे कोई चुनौती बड़ी नहीं होती।

इशांक की तैयारी को मजबूत बनाने में उसके कोच अमन कुमार जायसवाल की अहम भूमिका है। कोच जायसवाल ने बताया कि वह बच्चे की लगन देखकर व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। हर स्तर पर मार्गदर्शन कर रहे हैं। तकनीकी अभ्यास, सहनशक्ति, स्पीड और ओपन वाटर स्विमिंग की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वह बड़े मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

इशांक की सफलता से गदगद उसकी मां मनीषा ने कहा कि इशांक के लिए तैराकी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी पसंद है। वह हर दिन पूरे उत्साह के साथ अभ्यास करता है। पिता सुनील का कहना है कि बेटे का यह प्रयास पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात हो सकती है। परिवार को विश्वास है कि इशांक आने वाले समय में राज्य और देश का नाम रोशन करेगा।

नन्हा तैराक इशांक अब विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच चुका हैं। दुनिया में सबसे कम उम्र में सबसे तेज तैराक हाेने की उपलब्धि उसने अपने जुनून की दम पर हासिल की है। काेच के अनुसार इशांक प्रतिदिन रांची के धुर्वा डैम में चार से पांच घंटे में 15 से 20 किलोमीटर तक कठिन अभ्यास करता है। उसकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सप्ताह में एक दिन वह लगातार आठ घंटे तक पानी में रहकर अपनी सहनशक्ति और मानसिक मजबूती को और बेहतर बनाता है।

ढाई साल की उम्र से तैराकी सीखने वाले इशांक के लिए पानी अब केवल खेल नहीं, बल्कि जुनून है। कम उम्र के बावजूद इशांक का ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद मजबूत है। वह कई जिला और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुका है। हाल ही में 22 फरवरी को मुंबई में आयोजित गेटवे ऑफ इंडिया इवेंट में उन्होंने अरेबियन समुद्र में एक किलोमीटर तैराकी प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है। डीएवी श्यामली में तीसरी कक्षा के छात्र इशांक का शैक्षणिक प्रदर्शन भी अच्छा है। इशांक की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लहर रास्ता नहीं रोक सकती।

उल्लेखनीय है कि इशांक ने गुरुवार काे झारखंड के 7 साल इशांक ने समुद्र की लहरों पर तैरकर दुनिया के सबसे कम उम्र और सबसे तेज तैराक होने का दोहरा रिकॉर्ड बनाया है। इशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से तैरना शुरू कर भारत के धनुषकोडी तक की दूरी केवल 9 घंटे 50 मिनट में पूरी की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे