रक्षा मंत्री तीन दिवसीय दौरे पर श्रीलंका जाएंगे, द्विपक्षीय रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर होगी वार्ता

 

-दोनों देशों के रिश्तों को भी और मजबूत करेगा श्रीलंका दौरा

नई दिल्ली, 06 सितंबर (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 08 से 10 सितंबर तक श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। इस दौरान राजनाथ सिंह श्रीलंका के नेतृत्व और कोलंबो में भारतीय समुदाय से बातचीत करेंगे। वह रक्षा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों वाले उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा पारंपरिक रूप से मजबूत और दोस्ताना दोनों देशों के रिश्तों को और भी मजबूत करेगा।

रक्षा मंत्री के इस दौरे का मकसद भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय रक्षा और समुद्री सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना है। वे श्रीलंका के राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या और रक्षा सचिव संपथ थुयाकोंथा से मुलाकात करेंगे। राजनाथ सिंह कोलंबो में वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों (भारतीय समुदाय) से भी बातचीत करेंगे। उनके साथ रक्षा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस उच्चस्तरीय यात्रा में शामिल होंगे। दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 5 अप्रैल, 2025 को कोलंबो यात्रा के दौरान साइन किए गए भारत-श्रीलंका रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन को पूरी तरह और समय पर लागू करने समीक्षा भी किये जाने की उम्मीद है।

भारत और श्रीलंका के बीच पांच साल का यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और हिंद महासागर में साझा सुरक्षा चिंताओं को दूर करता है। इस एग्रीमेंट में कई एरिया शामिल हैं, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास को बढ़ाना, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता और आपदा राहत सहयोग और दोनों देशों के नेवी वेसल के पोर्ट कॉल बढ़ाना शामिल है। इसमें रक्षा उद्योग में सहयोग के मौके तलाशने का भी प्रावधान है। पांच साल के लिए वैध यह एग्रीमेंट दोनों में से कोई भी पक्ष तीन महीने पहले नोटिस देकर खत्म कर सकता है। इसे आपसी एग्रीमेंट से तीन साल के लिए और बढ़ाया भी जा सकता है।

भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत रिश्ते और कई तरह की साझेदारी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक और व्यापार सहयोग और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों पर आधारित है। दोनों देशों के रिश्तों को और बढ़ावा तब मिला, जब भारत ने आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका की मदद की। इसके अलावा 2025 में श्रीलंका में आए साइक्लोन दितवाह के बाद सबसे पहले मदद करने वालों में से एक रहा। भारत ने ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी पर लगातार प्रतिबद्धता पर जोर दिया और क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र तरक्की के विजन को दिखाया। 

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम