ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि : रेलमंत्री

 


नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को हिमालय क्षेत्र में इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि बताया है। 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 12 स्टेशन हैं और लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण, यह भारत की सबसे जटिल रेलवे परियोजनाओं में से एक है।

वैष्णव ने बताया कि इससे चार धाम तीर्थस्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस परियोजना के 2028-2029 तक पूरा होने का लक्ष्य है।

परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने एक वीडियो साझा किया है। एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा कि रेल लाइन का 104 किलोमीटर सिर्फ सुरंगों में होगा। पूरे प्रोजेक्ट में 16 सुरंगें और 19 बड़े पुल बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस रूट पर योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, श्रीनगर, गौचर और कर्णप्रयाग समेत 12 स्टेशन होंगे। यह परियोजना चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि कर्णप्रयाग भारत-चीन सीमा से मात्र 123 किलोमीटर दूर है।

मंत्री ने बताया कि हिमालय की जियोलॉजी बेहद जटिल है। यहां कठोर चट्टान की जगह कई जगह नरम मिट्टी और कीचड़ जैसा मटेरियल मिलता है, जिससे सुरंग बनाना चुनौतीपूर्ण है। इसी चुनौती से निपटने के लिए पहली बार टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। हिमालय के हिसाब से मशीन के कटरहेड और थ्रस्ट सिस्टम में विशेष बदलाव किए गए हैं।

सबसे कठिन 11 किलोमीटर लंबी टनल-1 है, जो घनी आबादी वाले क्षेत्र के नीचे से गुजर रही है। इसे मजबूत करने के लिए माइक्रो पाइल्स का उपयोग हो रहा है। दो टीबीएम को 'शिव' और 'शक्ति' नाम दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा