(अपडेट) क्वाड बैठक में दुर्लभ खनिज पहल की घोषणा, 20 अरब डॉलर जुटाये जाएंगे

 


नई दिल्ली, 26 मई (हि.स.)। भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक में चार प्रमुख क्षेत्रों हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकी को मजबूत करने तथा पूरे क्षेत्र में मानवीय सहायता एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिए प्रमुख नई पहलों की घोषणा की गयी।

हैदराबाद हाउस में मंगलवार को भारत समेत इन चार देशों के चतुष्कोणीय रणनीतिक गठजोड़ क्वाड के विदेश मंत्रियों की 11वीं बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हुए।

क्वाड देश विशेष रूप से दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग करेंगे। सुरक्षित और विविधीकृत महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला विकसित करने के लिए क्वाड दुर्लभ खनिज पहल शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास और औद्योगिक मजबूती को समर्थन देना है। क्वाड साझेदार खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण क्षेत्रों में सरकारी तथा निजी निवेश के माध्यम से 20 अरब डॉलर तक की सहायता जुटाने का प्रयास करेंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार इसके तहत रणनीतिक परियोजनाओं की पहचान, निजी पूंजी को प्रोत्साहन और निर्यात ऋण एजेंसियों के सहयोग पर बल दिया गया है। देशों ने लाइसेंसिंग, नियामकीय प्रक्रियाओं और भूवैज्ञानिक संसाधन आकलन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। साथ ही ई-कचरे और स्क्रैप सामग्री से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सके।

क्वाड बैठक पर विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग में अतिरिक्त सचिव के. नागराज नायडू ने कहा कि विदेश मंत्रियों की बैठक में सहयोग के चार प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हुई। इनमें समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां तथा मानवीय सहायता और आपदा प्रतिक्रिया शामिल हैं। मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री मार्गों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्वाड ने इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस के तहत सहयोग का विस्तार किया है।

नायडू ने आतंकवाद विरोधी अभियान को क्वाड सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और कहा कि विदेश मंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की। संयुक्त बयान में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की विशेष रूप से निंदा की गई और आतंकवादी संगठनों, उनके वित्तपोषण और प्रायोजकों के खिलाफ निर्णायक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

विदेश मंत्रालय की ओर से सहयोग के चार क्षेत्रों के बारे में एक फेक्टशीट जारी की है।

समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा

क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी सहयोग बढ़ाने के लिए इंडो-पैसिफिक मैरिटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन पहल शुरू की। इसके तहत सूचना साझाकरण और समुद्री जागरूकता क्षमता मजबूत होगी। क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस के अंतर्गत साझा कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर विकसित करने पर भी सहमति जताई। भारत अगला क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन आयोजित करेगा। वहीं सितंबर 2025 में भारत ने आतंकवाद विरोधी कार्यशालाएं आयोजित कीं। जून 2026 में ऑस्ट्रेलिया में राज्य प्रायोजित आतंकवाद और ड्रोन खतरों पर क्वाड काउंटर टेररिज्म टेबलटॉप अभ्यास आयोजित होगा।

आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा

क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला मजबूत करने के लिए नया क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क घोषित किया। इसके तहत खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में निवेश तथा आर्थिक समन्वय बढ़ाया जाएगा। इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पहल के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलापन बढ़ाने पर भी सहमति बनी। भारत में अक्टूबर 2025 में आयोजित क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर सम्मेलन के बाद फिजी में बंदरगाह अवसंरचना विकास में सहयोग की घोषणा की गई। क्वाड देशों ने समुद्री, अवसंरचना और स्टेम क्षेत्रों में कौशल विकास फेलोशिप जारी रखने का निर्णय लिया। साथ ही, 2026 तक सभी पैसिफिक आइलैंड फोरम देशों को समुद्रतल केबल नेटवर्क से जोड़ने और ऊर्जा प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं में 25 मिलियन डॉलर से अधिक सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी

क्वाड देशों ने पलाऊ में ओपन रैन सहयोग के अंतर्गत सुरक्षित 4जी और 5जी कनेक्टिविटी बढ़ाने की प्रगति का स्वागत किया। क्वाड साझेदार 6जी मानकों के विकास पर भी सहयोग करेंगे। डिजिटल पहचान मानकों पर कार्यशाला आयोजित कर सीमा पार तकनीकी समन्वय मजबूत किया जाएगा। एआई-एंगेज पहल के तहत छह अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परियोजनाओं के लिए 60 लाख डॉलर से अधिक सहायता घोषित हुई। इन परियोजनाओं से फसल उत्पादन, कीट प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा में तकनीकी सुधार को बढ़ावा मिलेगा।

मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया

क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वास्थ्य आपात स्थितियों और महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों के प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया है। इन प्रयासों का मूल्य 50 मिलियन डॉलर से अधिक है। वहीं 2025 में होनोलूलू में आयोजित टेबलटॉप अभ्यास और रणनीतिक कार्य समूह बैठक ने क्वाड की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया।

विदेश मंत्रियों के बयान

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि क्वाड का समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इसमें निगरानी, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, रसद नेटवर्क, समुद्र के भीतर केबल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत गतिविधियां शामिल हैं। इन क्षेत्रों को और गहरा बनाया जाएगा ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री वाणिज्य सुनिश्चित हो सके। अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्ती से पालन कराना क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए आवश्यक है। हमारे चारों देश बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं। हम मानते हैं कि आर्थिक लचीलापन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, आपूर्ति श्रंखला को मजबूत किया जाना चाहिए, विश्वसनीय और सुरक्षित प्रौद्योगिकियों का प्रसार होना चाहिए तथा उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिए। लक्ष्य है कि अपने बीच सहयोग को तेज किया जाए और दूसरों की भी मदद की जाए।

जयशंकर ने कहा कि स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत कई आयामों वाला है। आज की बैठक में कई आयामों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अन्य में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया गया। आने वाले दिनों में आर्थिक गतिविधि, ऊर्जा व्यापार या समुद्री वाणिज्य के रूप में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को दुनिया के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बन जाएगा। क्वाड की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और हमें उसके लिए तैयार रहना होगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं। पहली, हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल का शुभारंभ जो हिंद-प्रशांत में हमारे हर देश की समुद्री निगरानी क्षमताओं का उपयोग करके सूचना साझा करने को बढ़ावा देगा। इससे जुड़ा है हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल का विस्तार जो पूरे हिंद-प्रशांत में देशों को लगभग वास्तविक समय में वाणिज्यिक समुद्री डोमेन जागरूकता डेटा उपलब्ध कराएगा। उन्होंने भारत को क्वाड एट सी मिशन के अगले संस्करण की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया।

रुबियो ने कहा कि समुद्री सुरक्षा इतनी जरूरी क्यों है इसका कारण यह है कि मौजूदा घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि जब समुद्री सुरक्षा में बाधा आती है तो क्या हो सकता है। वैश्विक समुद्री व्यापार का 60 प्रतिशत हिंद-प्रशांत से होकर गुजरता है और यह न केवल यहां मौजूद चार देशों बल्कि दुनिया भर के दर्जनों देशों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित है। दूसरी पहल बंदरगार अवसंरचना पर है। प्रशांत महाद्वीप में बंदरगाह क्षमता की कमी के जवाब में हम फिजी के साथ मिलकर बंदरगाह अवसंरचना को आगे बढ़ाने की योजना की घोषणा कर रहे हैं। यह पहली बार होगा जब क्वाड देश किसी बंदरगाह अवसंरचना परियोजना पर साथ काम करेंगे। हमारा मानना है कि यह अत्यंत सफल होगा और भविष्य में अन्य परियोजनाओं के लिए मॉडल बनेगा। तीसरा विषय महत्वपूर्ण खनिजों का है। हम क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क की घोषणा करेंगे जो हमें आर्थिक नीति उपकरणों का लाभ उठाने और खनन, प्रसंस्करण तथा महत्वपूर्ण खनिजों के रिसाइक्लिंग सहित आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए निवेशों का समन्वय करने में मार्गदर्शन देगा।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर हम हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल की घोषणा करेंगे जो क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलापन को मजबूत करेगा। इस पहल के माध्यम से पार्टनर्स प्रौद्योगिकी प्रबंधन, नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों में सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करेंगे। इस पर एक अलग अलग से बयान जारी किया जाएगा और अमेरिका का ऊर्जा विभाग इस वर्ष के अंत में क्वाड पार्टनर्स की मेजबानी में ऊर्जा सुरक्षा फोरम आयोजित करेगा।

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि हिंद-प्रशांत में पारदर्शी और सुरक्षित समुद्री डोमेन सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। हिंद महासागर में मालाबार अभ्यास के दौरान समुद्री निगरानी प्रयासों का समन्वय होगा। समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल का विस्तार कर अवैध मछली पकड़ने और तस्करी से निपटने के लिए वास्तविक समय का सैटेलाइट डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशांत द्विपीय फोरम देशों को समुद्र के अंदर केबल उपलब्ध कराई जा रही है जिससे आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। दक्षिण‑पूर्व एशिया में स्कैम सेंटर्स के खिलाफ सहयोग और साइबर क्षमता निर्माण पर काम हो रहा है। जब हम साथ काम करते हैं तो अधिक मजबूत होते हैं और क्वाड आज ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर नई पहलें आगे बढ़ा रहा है।

जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि ईरान की स्थिति हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर प्रभाव डाल रही है जिसमें ऊर्जा आपूर्ति भी शामिल है। होर्मुज की खाड़ी में स्वतंत्र और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने और मध्य पूर्व में स्थिरता लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया गया। ऊर्जा सुरक्षा पहल सही समय पर उठाया गया कदम है और इसे पावर एशिया फ्रेमवर्क से जोड़ने की इच्छा जताई गई। क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए जरूरी है। बैठक ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर सामरिक धारणाओं को संरेखित करने का अवसर दिया। बल प्रयोग से यथास्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध किया गया। महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई गई। उत्तर कोरिया की परमाणु मिसाइल समस्याओं और साइबर गतिविधियों पर चर्चा हुई और पूर्ण निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर