छत्तीसगढ़ की राजधानी से सीधे बस्तर पहुंचे प्रधानमंत्री, अप्रत्याशित दौरे ने सभी काे चौंकाया
जगदलपुर, 08 नवंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छत्तीसगढ़ का बस्तर प्रवास इस बार बेहद अलग अंदाज में हुआ। न कोई बड़ी सार्वजनिक घोषणा, न स्वागत की भव्य तैयारियां और न ही प्रशासनिक हलचल की सामान्य तस्वीर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अचानक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे और यहां से सीधे बस्तर के लिए रवाना हो गए। उनके इस अप्रत्याशित दौरे की खबर से प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई। इतना ही नही बस्तर के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के किसी भी नेता की प्रधानमंत्री माेदी के साथ एक भी फाेटाे नजर नहीं आई।
इस अप्रत्याशित दौरे की छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुष्टि करते हुए प्रेस से चर्चा के दाैरान उन्हाेंने प्रधानमंत्री माेदी का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सली मुक्त बस्तर में दीपावली मनाने के लिए आने पर उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी और उनका आभार व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन की सूचना नहीं थी। प्रधानमंत्री ने बस्तर आने की अचानक ही योजना बनाई, यह हमारे लिए गर्व की बात है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री माेदी ने संभवतः रायपुर या बस्तर पहुंच कर एक्स हैंडल पर अपने आगमन की जानकारी दी। यह पहली मतर्बा है जब प्रधानमंत्री के आगमन पर उनके स्वागत के प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जा सका। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि संभवतः दीपावली त्याेहार को ध्यान में रख कर प्रवास को गोपनीय रखा गया, जिससे रायपुर के अधिकारी और निचले स्तर के कर्मचारी परेशान न हों। प्रधानमंत्री के आगमन पर प्रोटोकाल के तहत आला अधिकारियाें में कम से कम पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर को एयरपोर्ट पहुंचना होता है, उन्हें कहीं से कोई जानकारी नहीं दी गई। अधिकारी घर में फोन घुमाते रह गए और प्रधानमंत्री मोदी रायपुर आकर बस्तर चले गए। अब हड़बड़ाए रायपुर के अधिकारी प्रधानमंत्री की बस्तर से रायपुर वापसी की सूचना की प्रतीक्षा करते रहे और एयरपोर्ट में तैनात हाे गये ।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर रायपुर के कई वरिष्ठ अधिकारियों को पहले से स्पष्ट सूचना नहीं मिल पाई थी। प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री के आगमन पर पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर जैसे अधिकारियों की एयरपोर्ट पर मौजूदगी अपेक्षित रहती है, लेकिन इस बार स्वागत की सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था नजर नहीं आई। अधिकारी प्रधानमंत्री के रायपुर पहुंचने और बस्तर रवाना होने की जानकारी जुटाते रह गए। प्रधानमंत्री के इस दौरे को दीपावली के अवसर पर सुरक्षा बलों के बीच पहुंचने की विशेष पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दौरे को गोपनीय रखने और प्रोटोकॉल संबंधी परिस्थितियों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
राष्ट्रपति के बाद प्रधानमंत्री मोदी के आने के मायने, लाल आतंक पर विकास की मुहर और महज दो हफ्ते के अंतराल में बस्तर में देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक हस्तियों के आने के मायने बहुत महत्वपूर्ण है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 अक्टूबर को बस्तर दशहरा में शामिल होने जगदलपुर पहुंची थीं। अब प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली के अवसर पर बस्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों के साथ दीपावली का त्योहार मनाया। प्रधानमंत्री का जवानों के बीच दीपावली मनाना सुरक्षा बलों के योगदान को सम्मान देने के साथ बस्तर में आए बदलाव को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है।
आज एकाएक बस्तर आकर प्रधानमंत्री दीपावली को भी खास बना दिया है। दशकों तक हिंसा और खौफ के साये में जीने वाला बस्तर अब सुरक्षा और बदलाव के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। कल तक जिस क्षेत्र में नक्सलियों की दहशत का बोलबाला था, वहां आज चारों ओर बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। इस ऐतिहासिक बदलाव के केंद्र में हमारे वे वीर सुरक्षा बल हैं, जिन्होंने अपनी अदम्य वीरता से बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ा है। इन्हीं जवानों के बीच प्रधानमंत्री मोदी दीपावली मना रहे हैं। कुछ समय पहले तक जहां सिर्फ गोलियों की आवाजें सुनाई देती थीं, आज वहां सड़कें, स्कूल और अस्पताल बन रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा दिखाता है कि बस्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति पूरी तरह रंग ला रही है।
प्रधानमंत्री का यह बस्तर दौरा सिर्फ एक रस्म अदायगी नहीं है। सालों तक जिस बस्तर की पहचान सिर्फ बारूद और खौफ से होती थी, वहां प्रधानमंत्री का पहुंचकर दिवाली मनाना एक बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश देता है। यह इस बात का सीधा सबूत है कि केंद्र और राज्य की साझा कोशिशों के चलते अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और बस्तर लाल आतंक के अंधेरे से बाहर निकल आया है। प्रधानमंत्री हर साल जवानों के साथ ही दिवाली मनाते हैं, लेकिन इस बार बस्तर के बीहड़ों को चुनना सुरक्षा बलों के लिए बहुत मायने रखता है। घने जंगलों में अपनी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे जवानों के बीच जब देश का प्रधानमंत्री खड़े होते हैं, तो उनका मनोबल आसमान छूने लगता है। यह कदम देश के रक्षकों के त्याग को सीधे तौर पर एक बड़ा सम्मान वे जैसा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे