राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का भव्य सम्मान, प्रतिनिधिमंडल ने साझा किए बदलते बस्तर के अनुभव
रायपुर, 31 जुलाई (हि. स.)। राष्ट्रपति भवन में बस्तर के जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर से पहुंचे परगना मांझियों, चालकियों, बस्तर पंडुम के कलाकारों और समाज प्रतिनिधियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मान किया।
इस दौरान उन्होंने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल की पहल से आयोजित इस यात्रा ने बस्तर के प्रतिनिधियों को देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान से जुड़ने का अवसर दिया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वयं अपने हाथों से प्रतिनिधियों को भोजन परोसा। मुख्यमंत्री ने दाल, जबकि उप मुख्यमंत्री और संस्कृति मंत्री ने मिठाई परोसकर अतिथियों का स्वागत किया। इस आत्मीय व्यवहार से प्रतिनिधिमंडल भावविभोर हो उठा।
राष्ट्रपति भवन परिसर में बस्तर पंडुम के विजेता कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बस्तर की वेशभूषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत की इस प्रस्तुति ने राष्ट्रपति भवन को बस्तर की रंगत से सराबोर कर दिया।
प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से बातचीत में बदलते बस्तर की तस्वीर भी प्रस्तुत की। पद्म सम्मान से सम्मानित काष्ठ कलाकार अजय मंडावी ने कहा कि अब शांति और सुरक्षा के माहौल में बस्तर की कला को वैश्विक पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वहीं समाज प्रतिनिधियों ने शिक्षा, सड़क, दूरसंचार और विकास कार्यों में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी देते हुए राष्ट्रपति को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
दिल्ली प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, अमर जवान ज्योति, राजघाट, चांदनी चौक, जामा मस्जिद और शीशगंज गुरुद्वारा सहित कई ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। पहली बार राजधानी पहुंचे कई युवाओं के लिए यह यात्रा जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर