प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक-2026 का कई सांसदों ने किया विरोध

 


नई दिल्ली, 21 जुलाई (हि.स.)। प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में विपक्षी दलों के सांसद सहित कई सामाजिक संगठन लामबंद हो रहे हैं। मंगलवार को ज्वाइंट एक्शन फोरम ऑन माइनोरटी (जेएएफएम) द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श बैठक में 100 से अधिक सांसदों, चर्च नेताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और ईसाई संगठनों के नेताओं ने प्रस्तावित एफसीआरए का विरोध किया।

बैठक की अध्यक्षता जेएएफएम के अध्यक्ष और सांसद पी. विल्सन ने की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक समाज और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती है और संसद को इसे अस्वीकार करना चाहिए।

बैठक को सांसद कनिमोझी करुणानिधि, जॉन ब्रिटास, संजय सिंह, सिवदासन, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, सांसद कॉन्स्टेंटाइन रविंद्र, यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम के टोको टेकी, इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया के कर्नल एंड्रयू क्रिश्चियन, चर्च और स्वास्थ्य क्षेत्र के कई प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से कहा कि यह विधेयक केवल नियामक कानून नहीं बल्कि संवैधानिक स्वतंत्रता, धार्मिक आजादी, संस्थागत स्वायत्तता और भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है।

बैठक में अपने संबोधन में ज्वाइंट एक्शन फोरम ऑन माइनोरटी के अध्यक्ष पी विल्सन ने कहा कि विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले शैक्षणिक, स्वास्थ्य और धर्मार्थ संस्थानों पर धार्मिक परिवर्तन (धर्मांतरण) कराने के आरोप निराधार हैं। वक्ताओं ने कहा कि सरकार किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास या उसकी अभिव्यक्ति को मनमाने ढंग से नियंत्रित नहीं कर सकती और दशकों से समाज सेवा कर रहे संस्थानों को संदेह की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

परामर्श बैठक में देशभर में जनजागरूकता अभियान तेज करने, विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से संपर्क बढ़ाने, चर्चों और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा विधेयक वापस लेने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान का विस्तार करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित एफसीआरए (संशोधन) विधेयक, 2026 को वापस लेने और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही आगे बढ़ने की अपील की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी