कांग्रेस ने वाम विचारधारा को सहारा देकर नक्सलवाद को फैलने दिया: निशिकांत दुबे
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने देश में नक्सलवाद के प्रसार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए आज कहा कि कांग्रेस ने सत्ता प्राप्ति के लिए वामपंथी विचारधारा का सहारा लिया और वामपंथियों ने इसका फायदा उठाकर देश में नक्सलवाद को फैलाया।
निशिकांत दुबे ने लोकसभा में सोमवार को नियम 193 के तहत नक्सलवाद मुक्त भारत विषय पर हुई अल्पकालीन चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि साल 1967 से लेकर 1969 के दौरान पार्टी की अंदरूनी गतिरोध के समय राष्ट्रपति चुनाव में जब वी वी गिरी को जिताना था और नीलम संजीव रेड्डी को हराना था, तब कांग्रेस ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के साथ मिलकर अपनी सरकार बनाई और वी वी गिरी को राष्ट्रपति बनाया। इसी राजनीतिक गठजोड़ के बाद देश में नक्सलवाद पैदा हुआ और फैलता चला गया।
निशिकांत दुबे नेकहा कि हम सभी इस सदन में जितने भी सदस्य बैठे हैं वो इस इतिहास के बड़े गवाह हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने इस देश के इतिहास को ठीक कर दिया, बदल दिया। अनुच्छेद 370 खत्म होते हुए हमने देखा। इसी सदन में 35 ए खत्म होते हुए देखा। इसी सदन में महिला रिजर्वेशन बिल 33 फीसदी इसी सदन में बदलते हुए देखा और आज 31 मार्च 2026 जो उन्होंने लक्ष्य रखा है उसके पहले 30 मार्च को यह गृह मंत्री इतनी मजबूती के साथ पूरे देश को यह संदेश देना चाहते हैं कि हम जो कहते हैं वो करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह उस परिवार से आते हैं जिसके दादा नक्सलवाद की भेंट चढ़ गए और आज तक उनकी लाश नहीं मिली। वह उस परिवार से आते हैं जिसके दादा नक्सलवाद की भेंट चढ़ गए थे और आज तक उनकी लाश नहीं मिली। झारखंड में बाबूलाल मरांडी के बेटे को भी नक्सलियों ने गोली से मार दिया था। झारखंड के 24 में से 18 जिले नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। पहले सदन में चर्चा होती थी कि एसआर फंड कैसे जाएगा, सारंडा कैसे खत्म होगा, मनरेगा कैसे खत्म होगा, लेकिन आज नक्सलवाद की लड़ाई खत्म हो रही है।
उन्होंने कहा कि चारु मजूमदार क्या आदिवासी थे? नहीं वह आदिवासी नहीं थे। कानू सान्याल, विनोद मिश्रा और विश्वनाथ तिवारी ब्राह्मण थे। सत्यनारायण कम्मा, कम्मा थे। नागा रेड्डी, रेड्डी समुदाय से आते थे। इन्हीं 7 से 8 लोगों ने आंदोलन किया। इनमें से कोई भी आदिवासी नहीं था। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन विचारधारा की लड़ाई थी और जवाहरलाल नेहरू ने 1 अप्रैल 1949 को सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा था कि कम्युनिस्ट आंदोलन देश की सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन कांग्रेस पार्टी जब टूटी तो पार्टी ने 1967 से लेकर 1969 तक कम्युनिस्ट पार्टी का सहारा लेकर सरकार बनाई और नक्सलवाद को बढ़ावा दिया। इंदिरा गांधी ने नेहरू जी की बात न मानकर बहुत बड़ी गलती की।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले कांग्रेस ने आदिवासियों का सबसे बड़ा अधिकार छीन लिया। संविधान के अनुच्छेद 339 में लिखा था कि अनुसूचित पांचवीं और छठी अनुसूची वाले आदिवासी जिलों का विकास मॉडल भारत सरकार खुद बनाएगी। लेकिन, आपातकाल के दौरान, 1976 में, कांग्रेस ने इस अनुच्छेद को खत्म कर दिया और आदिवासियों के अधिकार छीन लिए। यानी, जहां आदिवासियों के लिए अलग से विकास की योजना बननी चाहिए थी, वहां कांग्रेस ने वह व्यवस्था ही समाप्त कर दी। इसी वजह से आदिवासी इलाकों में विकास रुक गया और लोग असंतोष में हथियार उठाने लगे।
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने 1 अप्रैल 1949 को सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा था कि कम्युनिस्ट आंदोलन देश की सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन कांग्रेस ने सीपीआई का सहारा लेकर सरकार बनाई और नक्सलवाद को बढ़ावा दिया। आपातकाल के दौरान 1976 में कांग्रेस ने अनुच्छेद 339 खत्म कर आदिवासियों के अधिकार छीन लिए।
दुबे ने कहा कि चीन ने 1967 में नक्सलवादी गतिविधियों का समर्थन किया और 1969 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने इसका प्रस्ताव पारित किया। कांग्रेस ने चीन समर्थित नक्सलवादियों को टिकट दिया और चुनावों में उतारा। साल 1980 में 35 लोग चीन में ट्रेनिंग के लिए गए और उनमें से कई को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद को बढ़ावा दिया, जबकि भाजपा ने लोगों का विश्वास जीतकर इसे खत्म किया। प्रधानमंत्री जन मन कार्यक्रम, धरतीआबा कार्यक्रम, बिरसा मुंडा को सम्मान देने का कार्यक्रम और आकांक्षी जिलों का विकास इस दिशा में अहम कदम हैं। जिस इलाके में पहले एक्सरे मशीन तक नहीं थी, वहां आज एम्स, हवाई अड्डे, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा कि आज झारखंड में 18 में से कोई भी जिला नक्सलवाद प्रभावित नहीं है। यह संभव हुआ है क्योंकि केंद्र सरकार ने लगातार विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाए, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाए और सुरक्षा बलों ने सख्ती से नक्सलियों का मुकाबला किया। हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को चुना, बड़े नक्सली नेताओं का सफाया हुआ और जिन जिलों में कभी हिंसा का बोलबाला था, वहां अब उद्योग, सड़कें और अस्पताल खड़े हैं। यदि राज्य सरकार ने भी केंद्र के साथ पूरा सहयोग किया होता तो पहले ही झारखंड पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त हो जाता।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर