अंतरिक्ष की नई उड़ानों के लिए जरूरी है ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच: सुधीर मिश्रा
देहरादून, 25 अगस्त (हि.स.)। ब्रह्मोस के पूर्व सीईओ एवं एमडी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि अंतरिक्ष की अनंत संभावनाओं को साकार करने के लिए परंपरागत सोच से आगे बढ़ना होगा। कल्पनाओं को नवाचार से जोड़कर ही अंतरिक्ष की नई उड़ानों का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच मानवता को अंतरिक्ष की अगली सीमा तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डॉ. मिश्रा मंगलवार को ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों पर विद्यार्थियों से चर्चा की। रॉकेट तकनीक के इतिहास से लेकर भारत की स्वदेशी रॉकेट तकनीक के विकास तक की यात्रा साझा करते हुए उन्होंने वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक अब केवल सुरक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की तकनीकी क्षमता का भी प्रतीक है।
इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. संजय मित्तल ने विद्यार्थियों को विमान तकनीक और उड़ान गतिकी के वैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने विमान के विकास और उड़ान के इतिहास से शुरुआत करते हुए विभिन्न प्रकार के विमानों, उनके डिजाइन और संरचना की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. मित्तल ने स्ट्रीमलाइन बॉडी और ब्लफ बॉडी के उदाहरणों से समझाया कि वायुप्रवाह को नियंत्रित करने वाली संरचना विमान की गति, स्थिरता और दक्षता को प्रभावित करती है।
कार्यक्रम का आयोजन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, एनईपी सारथी, टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर, बीआईएस, इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल और ऑर्बिट क्वेस्ट क्लब ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ, विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर जोशी, टीबीआई की सीईओ सरिस्मा डांगी सहित शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय