ओएसओपी योजना 2 हजार से अधिक रेलवे स्टेशनों तक पहुंची, 1.32 लाख कारीगरों को मिला सीधा बाजार
नई दिल्ली, 20 जनवरी (हि.स.)। भारतीय रेल की वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (ओएसओपी) योजना ने देशभर में स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक शिल्प को नई पहचान दिलाई है। यह पहल अब दो हजार से अधिक रेलवे स्टेशनों तक विस्तार पा चुकी है, जिससे 1.32 लाख से अधिक कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और बाजार से जोड़ने में सफलता मिली है।
रेल मंत्रालय के मंगलवार को एक बयान के अनुसार रेलवे स्टेशनों पर स्थापित ओएसओपी आउटलेट्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को रोजाना लाखों यात्रियों तक सीधी पहुंच मिल रही है। इससे न केवल कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उन पारंपरिक शिल्पों और क्षेत्रीय उत्पादों को भी नया जीवन मिला है, जो समय के साथ गुमनामी की ओर बढ़ रहे थे।
पूर्वोत्तर भारत की बांस एवं हस्तनिर्मित वस्तुएं, विभिन्न राज्यों के हथकरघा उत्पाद, मसाले, स्थानीय मिठाइयां और हस्तशिल्प ओएसओपी के तहत हर स्टेशन अपने क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को प्रदर्शित कर रहा है। यह पहल स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए यात्रियों के लिए खरीदारी के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी उपलब्ध करा रही है।
भारतीय रेल का यह कदम ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को मजबूती देता है और समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ओएसओपी योजना के विस्तार से रेलवे स्टेशन अब केवल यात्रा के केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यम, रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के सशक्त मंच के रूप में उभर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार