'एक देश-एक चुनाव' से लोकतंत्र होगा मजबूत, देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ : पीपी चौधरी

 


लखनऊ, 15 जुलाई (हि.स.)। 'एक देश-एक चुनाव' के लिए उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों, संगठनों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर रही संयुक्त संसदीय समिति को कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं। अपने दाैरे में मिले सुझावाें काे लेकर लखनऊ में बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लोकतंत्र को मजबूत करेगी और देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर कई समितियां पहले भी सिफारिश कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि संसद से विधेयक पारित होता है तो वर्ष 2029 से चरणबद्ध तरीके से कई राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं।

'वन नेशन, वन इलेक्शन' से संबंधित संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 एवं संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर गठित संसदीय संयुक्त समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि 'एक देश-एक चुनाव' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच है और इसका उद्देश्य लोकतंत्र को अधिक मजबूत, प्रभावी तथा देशहित के अनुरूप बनाना है। उन्होंने कहा कि 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे इसलिए यह व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है और इससे व्यवस्था अधिक मजबूत हाेगी।

उच्चस्तरीय समिति कर चुकी है सिफारिशसमिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बताया कि 1968 में कांग्रेस शासन के दौरान राष्ट्रपति शासन और कुछ राज्यों के पुनर्गठन के कारण चुनावों का कैलेंडर प्रभावित हुआ। बाद में आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल बढ़ने से यह व्यवस्था पूरी तरह से बदल गई। 1983 में चुनाव आयोग, 2002 की समिति, 2015 की नीतिगत समिति, 2018 में नीति आयोग और 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश कर चुकी है।

एक सवाल के जवाब में समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल चुनावों का एक समान समय निर्धारण है, इससे संविधान के मूल ढांचे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस व्यवस्था से देश की अर्थव्यवस्था को करीब सात लाख करोड़ रुपये का लाभ होगा। बार-बार चुनाव होने से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गृह राज्यों में लौट जाते हैं, जिससे उद्योग, शिक्षा और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

अब तक सकारात्मक अनुभव मिलेसमिति के अध्यक्ष चौधरी ने अपनी समिति के विभिन्न राज्यों के दौरों का जिक्र करते हुए बताया कि समिति देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर सभी पक्षों की राय ले रही है; उत्तर प्रदेश में भी काफी सकारात्मक सुझाव मिले हैं और सत्तापक्ष, विपक्ष समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मिल कर अपनी बातें रखीं; इसी प्रकार विभिन्न संगठनों ने भी अपने सुझाव दिए हैं। कुल मिलाकर अब तक सकारात्मक अनुभव मिले हैं।

उन्होंने कहा कि यदि संसद से विधेयक पारित होता है तो वर्ष 2029 से चरणबद्ध तरीके से कई राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और राजनीतिक स्थिरता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। समिति सरकारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव के साथ रचनात्मक विश्वास प्रस्ताव जैसे प्रावधानों पर भी विचार कर रही है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह