लक्ष्य और संकल्प के साथ किया गया परिश्रम बाधाओं को दूर करता है : ओम बिरला

 


नई दिल्ली, 14 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को यहां कहा कि लक्ष्य और संकल्प के साथ किया गया परिश्रम न केवल बाधाओं को मिटाता है बल्कि सफलता का मार्ग भी खोलता है।

ओम बिरला ने दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में लेडेक्स और आइकन एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एलीना और महान संविधान (बाल संविधान) पुस्तक लोकार्पण के दौरान यह बात कही। इसकी टैगलाइन 'बाल संविधानः बचपन से पढ़े संविधान तो देश बने महान' है जो इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ने दी है।

इस पुस्तक श्रृंखला का उद्देश्य बचपन से ही बच्चों में संवैधानिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना है ताकि एक सशक्त और महान राष्ट्र का निर्माण हो सके।

मुख्य अतिथि के रूप में बिरला ने कहा, बाबासाहेब की यात्रा आने वाली पीढ़ी को हमेशा प्रेरणा देती रहेगी कि जीवन में कितनी ही विपरीत परिस्थितियां हों, कितनी भी चुनौतियां हों कितना भी घनघोर अंधेरा हो जब लक्ष्य और संकल्प के साथ काम किया जाता है तो चुनौतियां भी समाप्त होती हैं और अंधेरा भी समाप्त होता है।

उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को रखते हुए संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में एक ऐसा संविधान बनाया जो हम सबका मार्गदर्शक है और दुनिया के संसदीय लोकतंत्र के लिए मार्गदर्शक है।

अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा हमारा संविधान है। आज लोगों के जीवन को नैतिक अधिकार, न्याय का अधिकार देने का काम हमारे संविधान में निहित है। एक सामान्य अंतिम पड़ाव का व्यक्ति भी न्याय का समान अधिकार रखता है, मत का समान अधिकार रखता है और एक मानवीय जीवन जीने का अधिकार रखता है। ये समानता उनके जीवन का मूल रही क्योंकि उन्होंने असमानता देखी थी और यही भारत की ताकत बनी।

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्षों के बाद आज समाज का कोई भी क्षेत्र चाहे वह विज्ञान हो, रक्षा हो या उद्योग महिलाओं के नेतृत्व से अछूता नहीं है। अब यह नेतृत्व क्षमता विधायी संस्थाओं (संसद और विधानसभाओं) तक पहुंच रही है, जो लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है।

मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध किसी भी देश के विकास में रुकावट है। हमारी पार्टी देश की चिंता करता है, जबकि अन्य पार्टियां पार्टी कुर्सी की। उन्होंने संविधान की तुलना रामचरितमानस और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों से करते हुए इसे राष्ट्र का मार्गदर्शक बताया और कानून के छात्रों को बाबा साहब के जीवन दर्शन को आत्मसात करने की सलाह दी।

इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ ला की ग्रुप डायरेक्टर एवं डीन प्रो. (डॉ.) मनप्रीत कौर राजपाल ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए यह अनिवार्य है कि हमारे बच्चे बचपन से ही उन संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों को जानें जो उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बच्चों के मन में लोकतंत्र के प्रति सम्मान और जिज्ञासा पैदा करने का काम करेगी।

इस अभिनव पहल के संयोजक लेडेक्स और आइकन एजुकेशन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अक्षय कांति बम ने कहा कि, बाल संविधान के माध्यम से देश की भावी पीढ़ी को भारत के लोकतंत्र की नींव से जोड़ने का यह अपनी तरह का पहला और अनूठा प्रयास है।

इस मौके पर विशेष अतिथि कैलाश विजयवर्गीय, साक्षी महाविद्यालय के 1500 विद्यार्थी और विभिन्न विद्यालयों के 500 से अधिक विद्यार्थियों सहित अन्य़ गणमान्य जन मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी