दीपावली पर पटाखों से आंखों की सुरक्षा के लिए एएसजी आई हॉस्पिटल ने शुरू किया अभियान

 


नोएडा, 05 नवंबर (हि.स.)। दीपावली पर पटाखों से आंखों में होने वाली गंभीर चोटों की रोकथाम एवं आपातकालीन उपचार को लेकर एएसजी आई हॉस्पिटल ने ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीपावली’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत पटाखों से आंख में चोट लगने पर 15 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी की सुविधा निःशुल्क दी जाएगी। अस्पताल ने इस संबंध में देशव्यापी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001200111 भी जारी किया है।

अस्पताल के नोएडा सेक्टर-18 स्थित केंद्र में गुरुवार को आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में नेत्र विशेषज्ञों ने अभिभावकों से बच्चों को पटाखों से दूर रखने और आंख में किसी भी तरह की चोट को गंभीरता से लेने की अपील की। अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा अग्रवाल ने कहा कि दीपावली के दौरान 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे पटाखों को लेकर सबसे अधिक उत्साहित रहते हैं और दुर्घटनाओं के प्रति भी सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को कभी अकेले पटाखे नहीं जलाने देना चाहिए। पटाखे हमेशा बड़ों की निगरानी में और सुरक्षित दूरी बनाकर जलाने चाहिए। पटाखे जलाने के लिए मोमबत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल करते समय भी पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है।

डॉ. अग्रवाल ने विशेष रूप से आगाह किया कि यदि कोई पटाखा एक बार में नहीं जलता है तो उसे दोबारा छूने या उसके पास झुककर देखने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामलों में अचानक विस्फोट होने से आंखों को गंभीर चोट पहुंच सकती है। आंख में कोई कण चला जाए या चोट लग जाए तो उसे बिल्कुल नहीं रगड़ना चाहिए और न ही आंख पर दबाव डालना चाहिए। ऐसी स्थिति में घी, तेल या किसी अन्य घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालना भी नुकसानदेह हो सकता है। आंख में चोट लगने पर हल्के से पेपर कप या किसी उपयुक्त सुरक्षा कवर से आंख को ढककर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक के पास पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है।

डॉ. अग्रवाल ने सामान्य चश्मे के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पटाखों के दबाव या विस्फोट से सामान्य चश्मे टूटकर आंखों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बचाव के लिए पॉलीकार्बोनेट से बने सुरक्षा चश्मों का इस्तेमाल करना चाहिए।

नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंकुर भटनागर ने पटाखों से आंखों के कॉर्निया और दृष्टि को होने वाले दीर्घकालिक नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कॉर्निया आंख का बेहद पारदर्शी और नाजुक हिस्सा होता है। पटाखों से चोट लगने या जलने के कारण इस पर निशान पड़ जाए तो इसकी पारदर्शिता पहले जैसी नहीं हो पाती। इससे व्यक्ति की दृष्टि स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है। आंख में मामूली खरोंच, जलन या लालिमा को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि पलकें झपकने के दौरान आंख के घाव में बार-बार रगड़ लग सकती है।

डॉ. भटनागर ने बताया कि एएसजी आई हॉस्पिटल समूह के देशभर के 90 से अधिक शहरों में 200 से ज्यादा केंद्र हैं। इन केंद्रों पर दीपावली के दिन भी 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। 15 वर्ष तक के बच्चों को पटाखों से आंख में चोट लगने की स्थिति में सर्जरी सहित सभी आपातकालीन सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

डॉ. मुहतशम तौहीद ने पटाखों से आंख में लगने वाली चोटों के प्रकार और प्राथमिक उपचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चोट की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि आंख किस तरह प्रभावित हुई है। यदि तेज धमाके के कारण आंख की पुतली या भीतरी हिस्से में गहरी चोट अथवा फटने जैसी स्थिति बन गई हो तो आंख को बिल्कुल नहीं धोना चाहिए और न ही उस पर किसी तरह का दबाव डालना चाहिए। यदि आंख में केवल धूल, बारूद या धुएं के कण गए हों तो साफ और बहते पानी से 10 से 15 मिनट तक हल्के हाथों से आंख धोई जा सकती है। हालांकि, गहरी चोट की आशंका होने पर ऐसा नहीं करना चाहिए। डॉ. तौहीद ने अभिभावकों से कहा कि ऐसी किसी भी घटना में घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। इसके लिए अस्पताल की टोल-फ्री हेल्पलाइन 18001200111 पर संपर्क कर नजदीकी केंद्र से परामर्श लिया जा सकता है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अक्षय कुमार ने पटाखों के धुएं और वायु प्रदूषण से आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाले धुएं और बारूद के कारण आंखों में एलर्जी, सूखापन और जलन की समस्या हो सकती है। पटाखों के धुएं से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भी प्रभावित होता है। ऐसे में लोगों को जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलना चाहिए और आंखों में केवल डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने पटाखे जलाते समय ढीले कपड़े नहीं पहनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए हरित पटाखों और दीयों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विशेषज्ञ डॉ. चेतन ने तेज आवाज वाले पटाखों और पोटाश गन जैसे खतरनाक उपकरणों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तेज धमाकों से आंखों में बारूद के छर्रे घुसने के साथ-साथ कान के पर्दे को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को पटाखों के शोर और धुएं के सीधे संपर्क में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि उनके शरीर के अंग बेहद संवेदनशील होते हैं।

इस दौरान सभी विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से अभिभावकों और आम लोगों से अपील की कि वे दीपावली पर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। पटाखे जलाते समय सावधानी बरतें, आंखों में चोट लगने पर घरेलू उपचार से बचें और तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी