गुजरात में ‘नो यूपीआई डे’: एमडीआर चार्ज के विरोध में 600 से अधिक व्यापारी संगठनों का विरोध

 


अहमदाबाद, 02 अक्टूबर (हि.स.)। गुजरात में व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में ‘नो यूपीआई डे’ के तहत अपना विरोध दर्ज कराया।

राज्य के करीब 600 से अधिक व्यापारी संगठनों के इस अभियान से जुड़ने का दावा किया गया है। अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट सहित विभिन्न शहरों में कई व्यापारियों ने दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड और भुगतान मशीनों को काले कपड़े से ढंककर ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की।

व्यापारी संगठनों की ओर से प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 तक के कुछ मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा, जबकि निर्धारित श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक एमडीआर लागू होने की बात कही गई है। कुछ पूंजी बाजार और म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन के लिए अलग दरों का भी उल्लेख किया गया है।

व्यापारियों ने कहा- अंततः ग्राहकों पर बढ़ सकता है बोझ

वडोदरा के मर्चेंट एसोसिएशन के भरत चौहान ने कहा कि यदि यह नियम लागू होता है तो अंततः इसका आर्थिक बोझ ग्राहकों पर बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस नियम को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को नागरिकों को दशहरा और दीपावली के अवसर पर यह राहत देनी चाहिए।

चौहान के अनुसार व्यापारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार को व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करना चाहिए।

‘नो यूपीआई डे’ के पोस्टर लगाए

व्यापारी संगठनों के इस विरोध के तहत कई दुकानों पर ‘नो यूपीआई डे’ के पोस्टर लगाए गए। ऑटोमोबाइल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, ज्वेलरी सहित विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों ने एमडीआर को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। व्यापारी संगठनों की ओर से यह भी दावा किया गया कि एक दिन के विरोध के कारण करीब ₹50 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि वास्तविक प्रभाव अलग-अलग बाजारों में यूपीआई के इस्तेमाल और कारोबार की मात्रा पर निर्भर करेगा।

क्या है एमडीआर?

एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों द्वारा व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क है। सामान्य तौर पर यह लागत व्यापारी स्तर पर होती है, हालांकि व्यापारी संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त लागत का असर अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। व्यापारी संगठनों ने सरकार एमडीआर से जुड़े प्रस्तावित नियम पर पुनर्विचार करने और व्यापारियों के साथ चर्चा कर समाधान निकालने की मांग की है। वडोदरा के व्यापारी प्रतिनिधि भरत चौहान ने सरकार से नियम वापस लेने की अपील करते हुए इसे दशहरा और दीपावली के अवसर पर नागरिकों के लिए राहत के रूप में देखने की मांग रखी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे