दंतेवाड़ा में बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन शिविर बने सीख और आत्मविश्वास का केंद्र
नई दिल्ली, 24 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के 17 गांवों में वंचित समुदायों के बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से 25 दिवसीय 20 ग्रीष्मकालीन शिविरों की शुरुआत की गई है। इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और खेलकूद से जोड़कर उनके व्यक्तित्व और कौशल का विकास करना है।
इस्पात मंत्रालय के अनुसार, यह विशेष पहल 20 मई से 15 जून-2026 तक राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) द्वारा शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत संगठन डब्ल्यूओएससी के सहयोग से संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे आत्मविश्वास और नई सीख के साथ आगे बढ़ सकें।
इस अभियान के तहत लगभग 1700 बच्चों को अनुभवात्मक शिक्षा, कला, संगीत, हस्तशिल्प और खेल गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकांश गांवों में शिविर शुरू हो चुके हैं, जबकि बच्चों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए अतिरिक्त बैच शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।
वर्तमान में प्रत्येक गांव में प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे शिविरों में भाग ले रहे हैं। बच्चे प्रतिदिन तीन से चार घंटे तक विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इन गतिविधियों में पढ़ाई के साथ-साथ हस्तशिल्प निर्माण, चित्रकला, संगीत कार्यशालाएं और रचनात्मक अभ्यास शामिल हैं। इसके बाद बच्चे फ्रिसबी, कबड्डी और खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों में भाग लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं। दिन के अंत में बच्चों को पौष्टिक और स्वस्थ जलपान भी उपलब्ध कराया जाता है।
शिविरों के माध्यम से बच्चों में टीमवर्क, अनुशासन, संवाद क्षमता और नेतृत्व कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं।
एनएमडीसी ने कहा कि शिक्षा और सामुदायिक विकास से जुड़ी यह पहल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को नई दिशा देने का प्रयास है। संस्था का मानना है कि बच्चों को रचनात्मक और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराकर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
स्थानीय स्तर पर भी इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि शिविर बच्चों को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सीखने और आत्मविश्वास विकसित करने का बेहतर अवसर प्रदान कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी