मानसून सत्र में कांग्रेस ने चर्चा से भागकर देश की लोकतांत्रिक मर्यादा को किया तार–तारः नितिन नवीन
नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उस पर देश की जनता को गुमराह करने, लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन करने का आरोप लगाया। बुधवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने एक बयान में कहा कि संसद लोकतंत्र का वह पवित्र मंदिर है, जहां जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा से देश की दिशा तय होती है लेकिन इस बार के मानसून सत्र में गैरजिम्मेदार कांग्रेस ने चर्चा से भाग कर और बार–बार अपना गोलपोस्ट चेंज कर देश की लोकतांत्रिक मर्यादा और गरिमा को ही तार–तार कर दिया। वास्तव में कांग्रेस ने देश की जनता को धोखा दिया है।
इस पूरे सत्र में राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का रवैया उनकी अराजक मानसिकता और लोकतंत्र-विरोधी सोच को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि पूरा सत्र बीतने को है, पर वे एक भी मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुए। पहले उन्होंने युवाओं के विषय पर चर्चा करने की मांग की, और जब सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार हो गई, तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन यह कहकर भाग खड़ा हुआ कि उन्हें कोई चर्चा ही नहीं करनी है।
नितिन नवीन ने कहा कि
सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष लगातार जनता के मुद्दों से भागता रहा। आखिर विपक्ष चर्चा से क्यों भाग रहा था? यह साफ तौर पर दिखाता है कि विपक्ष मुद्दों को लेकर न तो संजीदा है और न ही गंभीर।
संसद में कई नए सांसदों का यह पहला सत्र था। विपक्ष ने केवल हंगामा करके उन नए सांसदों के सामने हमारे लोकतंत्र की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर पेश की है। इनके इस अड़ियल रवैये के कारण देश प्रश्नकाल से भी वंचित रह गया और लोकतंत्र के इस मंदिर में जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बात तक नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि भारत में नेता प्रतिपक्ष का पद हमेशा से उच्च संवैधानिक गरिमा रखता आया है। लेकिन राहुल गांधी ने बार-बार अमर्यादित भाषा, अहंकार, अपने ढुलमुल और गैरजिम्मेदार रवैये से न सिर्फ इस पद को शर्मसार किया है, बल्कि सदन की मर्यादा और गरिमा में भी भारी गिरावट ला दी है।
सच्चाई यह है कि राहुल गांधी, कांग्रेस और इंडी गठबंधन चर्चा से इसलिए भाग रहा था क्योंकि उन्हें पता था कि जब गृह मंत्री संसद में बोलेंगे तो राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के सारे झूठ धाराशायी हो जायेंगे। पूरा देश जानता है कि जब गृह मंत्री सदन में तथ्यों के साथ बोलते हैं, तो उनके तर्कों के सामने विपक्ष की बोलती बंद हो जाती है। इसी डर से विपक्ष पूरे सत्र में केवल विषयों को बदलता रहा और चर्चा से भागता रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी