स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए नीति आयोग ने राज्य एवं जिला स्तरीय कार्यबल का दिया प्रस्ताव
नई दिल्ली, 07 मई (हि.स)। नीति आयोग ने देश में स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कार्यबल गठित करने की वकालत की है। साथ ही रचनात्मक और छात्र केंद्रित शिक्षा के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) को एकीकृत करने का सुझाव दिया है।
‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: समयगत विश्लेषण एवं गुणवत्ता सुधार के लिए नीति ढांचा’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में नीति आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए 13 सिफारिशें दी हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) निधि छिब्बर ने 6 मई को 'भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: गुणवत्ता संवर्धन के लिए सामयिक विश्लेषण और नीतिगत रूपरेखा' नामक एक रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट एक नीतिगत दस्तावेज है जो भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली का एक दशक लंबा व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिसमें पहुंच और नामांकन, बुनियादी ढांचा, समानता और समावेशन तथा सीखने के परिणाम जैसे प्रमुख मापदंडों को शामिल किया गया है।
नीति आयोग के मुताबिक ये रिपोर्ट विभिन्न माध्यमिक आंकड़ों जैसे यूडीआईएसई+ 2024-25, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, एनएएस 2017 और 2021 तथा एएसईआर 2024 पर आधारित है। इसके अलावा इसमें फरवरी 2025 में नीति आयोग द्वारा आयोजित गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया है। इस कार्यशाला में स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव समेत 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। प्रतिभागियों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिव, एनसीईआरटी और एससीईआरटी के निदेशक, जिला कलेक्टर, यूनेस्को, एनयूईपीए के प्रतिनिधि और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे।
इस रिपोर्ट में इन अनुशंसाओं के लिए कार्यान्वयन के 33 तरीके बताए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक को अल्प, मध्यम और दीर्घकालीन दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। इसमें केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार हितधारकों की स्पष्ट पहचान की गई है। प्रगति पर नजर रखने के लिए इसमें 125 से अधिक प्रदर्शन सफलता संकेतक दिए गए हैं। रिपोर्ट में देशभर से केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर अपनाए गए उत्कृष्ट नियमों की संक्षिप्त केस स्टडी भी शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर