महाराष्ट्र में जल्द घोषित होगी निवेशक अनुकूल समुद्री विकास नीतिः नितेश राणे

 


- 250 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार; समुद्री क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की तैयारी- 6,500 करोड़ कि लागत से बनेगा देश का सबसे बड़ा जहाज निर्माण केंद्र

मुंबई, 02 नवंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार जल्द ही देश की सबसे अधिक निवेशक अनुकूल समुद्री विकास नीति घोषित करने जा रही है। इसका उद्देश्य जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, बंदरगाह और समुद्री परिवहन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना तथा देश के प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में महाराष्ट्र की पहचान मजबूत करना है।

फिक्की द्वारा आयोजित ‘समुद्री भारत सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के उद्घाटन सत्र में राणे ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और सभी आवश्यक अनुमतियां एकल खिड़की व्यवस्था के माध्यम से प्रदान करेगी।

मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत देश का सबसे बड़ा जहाज निर्माण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में 26,500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 50 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष समुद्री शिखर सम्मेलन में किए गए निवेश समझौते अब वास्तविक निवेश में बदल चुके हैं।

फिक्की के निर्वाचित अध्यक्ष एवं सन्मार समूह के अध्यक्ष विजय शंकर ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश के प्रमुख बंदरगाहों ने रिकॉर्ड 91.5 करोड़ टन माल का संचालन किया, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। इस दौरान माल संचालन में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का 70 हजार करोड़ रुपये का समुद्री एवं जहाज निर्माण सहायता पैकेज राज्यों और उद्योगों के लिए बड़ा अवसर है। उन्होंने एकीकृत बुनियादी ढांचे, उद्योगों के निवेश और भारतीय जहाजों से घरेलू माल की ढुलाई बढ़ाने पर जोर दिया।

सम्मेलन में नीदरलैंड साझेदार देश के रूप में शामिल हुआ। नीदरलैंड के वाणिज्य दूत एवं उप मिशन प्रमुख थिएरी वान हेल्डेन ने भारत-नीदरलैंड हरित एवं डिजिटल समुद्री गलियारे को व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलने की आवश्यकता बताई। उन्होंने फरवरी 2027 में नीदरलैंड के जहाज निर्माण प्रतिनिधिमंडल के भारत दौरे की घोषणा की।

कार्यक्रम में समुद्री क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और उपलब्धियां भी सामने आईं। समुद्री प्रशासन के नौवहन सलाहकार एस.आई. अबुल कलाम आजाद ने बताया कि अब जहाजों का पंजीकरण 24 घंटे में किया जा सकता है। वहीं, भारतीय जहाजरानी निगम के अध्यक्ष बिनेश त्यागी ने तेल-गैस टैंकरों और मालवाहक जहाजों की मांग को एकत्रित कर जहाज निर्माण उद्योग के लिए दीर्घकालीन अवसर तैयार करने की जानकारी दी।

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष गौरव दयाल ने बताया कि बंदरगाह ने पिछले वर्ष 80 लाख से अधिक कंटेनरों का संचालन किया और चालू वर्ष में यह आंकड़ा 90 लाख पार करने की उम्मीद है।

सम्मेलन में फिक्की ने चार अध्ययन रिपोर्ट भी जारी कीं। इनमें बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, संपर्क व्यवस्था, जहाज निर्माण एवं मरम्मत और घरेलू कंटेनर उद्योग के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कंटेनर निर्माण की लागत चीन की तुलना में प्रति कंटेनर 650 से 800 डॉलर अधिक है। इसके बावजूद भारत अगले पांच वर्षों में वैश्विक कंटेनर निर्माण क्षमता का 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर सकता है। इसके लिए 4.8 से 6 लाख कंटेनर प्रतिवर्ष बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य सुझाया गया है।

कुल मिलाकर सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि अनुकूल नीतियों, निवेश प्रोत्साहन, आधुनिक बंदरगाहों और घरेलू विनिर्माण क्षमता के माध्यम से भारत को वैश्विक समुद्री उद्योग में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी